शहीदों की कुर्बानी याद है, लेकिन स्मारक का विकास भूल गया प्रशासन! तरियानी छपरा में कब बनेगा पार्क?

तरियानी छपरा में 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में 10 वीर सपूत शहीद हुए थे. वर्षों से शहीद पार्क बनाने की मांग हो रही है, लेकिन कई निरीक्षण और प्राक्कलन के बावजूद स्थल का विकास अधूरा है.

शिवहर न्यूज: भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 30 अगस्त 1942 को तरियानी छपरा में देश की आजादी के लिए 10 वीर सपूतों ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे. अंग्रेजी हुकूमत की गोलियों का सामना करने वाले इन शहीदों की स्मृति में बना स्थल आज भी विकास और जीर्णोद्धार का इंतजार कर रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि कई बार प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण किया, प्राक्कलन तैयार कराया, लेकिन शहीद पार्क बनाने की योजना अब तक जमीन पर नहीं उतर सकी.

अधिकारियों ने किया निरीक्षण, प्राक्कलन भी बना

स्थानीय लोगों के अनुसार, कई जिलाधिकारी तरियानी छपरा पहुंचकर शहीद स्मारक स्थल का निरीक्षण कर चुके हैं. अधिकारियों ने स्थल के विकास के लिए प्राक्कलन भी तैयार कराया, लेकिन इसके बाद काम आगे नहीं बढ़ सका. तत्कालीन डीएम राजकुमार ने शहीद स्मारक को विकसित कर मॉडल शहीद पार्क बनाने की बात कही थी. ग्रामीणों का आरोप है कि यह घोषणा भी कागजों तक ही सीमित रह गयी.

ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर किया श्रमदान

शहीद स्मारक स्थल के विकास में स्थानीय ग्रामीणों ने भी अपने स्तर से पहल की. आपसी सहयोग से चंदा जुटाकर लोगों ने श्रमदान किया और स्मारक स्थल को बेहतर बनाने का प्रयास किया. वर्ष 2016 में तरियानी छपरा चौक पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के अनावरण के दौरान जदयू नेता वशिष्ठ नारायण सिंह ने अपने निजी कोष से स्मारक स्थल के विकास की घोषणा की थी. इसके बाद करीब 20 लाख रुपये की लागत से चारदीवारी का निर्माण कराया गया.

वहीं, शिवहर की तत्कालीन सांसद रमा देवी की ओर से पहुंच पथ पर करीब 10 लाख रुपये की लागत से चारदीवारी का निर्माण कराया गया. पंचायत स्तर से मनरेगा के तहत मिट्टी भराई का काम भी कराया गया. ग्रामीणों का कहना है कि इसके अलावा बड़े स्तर पर कोई विकास कार्य नहीं हुआ.

शहीदों की याद में पार्क बनाने की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि तरियानी छपरा का शहीद स्मारक सिर्फ गांव या शिवहर जिले की धरोहर नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास से जुड़ा राष्ट्रीय महत्व का स्थल है. इसलिए इसका विकास पर्यटन और इतिहास की दृष्टि से भी किया जाना चाहिए. लोगों ने जिला प्रशासन से शहीद स्मारक के जीर्णोद्धार, सौंदर्यीकरण और शहीद पार्क के निर्माण की मांग की है.

30 अगस्त 1942 को शहीद हुए थे 10 वीर

तरियानी छपरा के ग्रामीणों के अनुसार, 30 अगस्त 1942 को स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान नवजद सिंह (65), भूषण सिंह (30), जय मंगल सिंह (45), सुखदेव सिंह (32), सुंदर राम (30), बुधन महतो (40), वंशीदास (35), परसन साह (50), छठ्ठू साह (45) और बलदेव साह (55) ने देश की आजादी के लिए बलिदान दिया था.

ग्रामीणों ने कहा कि इन शहीदों की कुर्बानी को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए स्मारक स्थल का संरक्षण जरूरी है. बार-बार निरीक्षण और प्राक्कलन के बजाय अब निर्माण कार्य शुरू होना चाहिए, ताकि शहीदों की धरती को उसका उचित सम्मान मिल सके.

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By Madhurendra kumar

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