Sheohar News: शिवहर. जिले के प्रगतिशील केला उत्पादक किसानों को कृषि क्षेत्र में नई तकनीक और नवाचार से जोड़ने के लिए सोमवार को परिभ्रमण कार्यक्रम आयोजित किया गया. बिहार सरकार के कृषि विभाग की आत्मा योजना के तहत नवाचार गतिविधि के अंतर्गत किसानों के विशेष दल को वैशाली स्थित कृषि विज्ञान केंद्र भेजा गया. यहां किसानों ने केले के तने से रेशा निकालने और उसके प्रसंस्करण की तकनीक की जानकारी प्राप्त की.
केले के तने से रेशा बनाकर बढ़ेगी किसानों की आमदनी
आमतौर पर केले की फसल तैयार होने के बाद उसके तनों को अपशिष्ट मानकर फेंक दिया जाता है. लेकिन केला रेशा प्रसंस्करण तकनीक के जरिए इसी अपशिष्ट से उपयोगी रेशा तैयार किया जा सकता है. इससे किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिल सकता है.
इस तकनीक से कृषि आधारित कुटीर उद्योग को बढ़ावा मिलने के साथ ग्रामीण स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है.
किसानों ने सीखी रेशा निकालने की पूरी प्रक्रिया
शिवहर प्रखंड तकनीकी प्रबंधक शिव कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में किसानों का दल वैशाली के लिए रवाना हुआ. शैक्षणिक परिभ्रमण का मुख्य विषय केला रेशा प्रसंस्करण रहा.
कृषि विज्ञान केंद्र वैशाली में किसानों को केले के तने से रेशा निकालने की पूरी प्रक्रिया की वैज्ञानिक जानकारी दी गयी. किसानों ने रेशा प्रसंस्करण में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक यंत्रों और मशीनों के संचालन की व्यावहारिक जानकारी भी प्राप्त की.
कृषि अपशिष्ट से रोजगार और कमाई का अवसर
केले के तने से रेशा तैयार करने की तकनीक किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का जरिया बन सकती है. इससे फसल के बाद बचने वाले कृषि अपशिष्ट का उपयोग भी संभव होगा. साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे स्तर पर प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित कर रोजगार के अवसर विकसित किए जा सकते हैं.
