गौरी शंकर मंदिर की महिमा अपरंपार, साक्षात महादेव करते हैं यहां वास

तरियानी प्रखंड के गौरी शंकर मंदिर का 500 साल पुराना इतिहास है, जहां सावन की तीसरी सोमवारी पर हजारों भक्त महादेव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचे. इस प्राचीन मंदिर को मनोकामना मंदिर के रूप में जाना जाता है, जहां सच्चे मन से मांगी गई मन्नतें पूरी होती हैं.

Sheohar News: तरियानी प्रखंड की सलेमपुर पंचायत स्थित प्रसिद्ध गौरी शंकर मंदिर में सावन की तीसरी सोमवारी पर हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. सुबह से ही भक्त भगवान महादेव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए मंदिर पहुंचते रहे. श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और पुष्प अर्पित कर सुख-समृद्धि एवं परिवार के मंगल की कामना की. मंदिर में मौजूद शिवलिंग पर त्रिशूल और डमरू जैसे निशान होने की मान्यता के कारण यहां श्रद्धालुओं की विशेष आस्था है.

गौरी शंकर मंदिर की तस्वीर दर्शन करते श्रद्धालु

Tariani News: करीब 500 वर्ष पुराना है गौरी शंकर मंदिर

ग्रामीणों के अनुसार गौरी शंकर मंदिर करीब 500 वर्ष पुराना है. पहले यह इलाका सलेमपुर दरबार की भूमि का हिस्सा था और यहां घना जंगल हुआ करता था. ग्रामीणों के अनुसार एक बार जंगल में लकड़ी काटने के दौरान जमीन के अंदर शिवलिंग मिला.

बताया जाता है कि कुदाल लगने के बाद अलग तरह की आवाज सुनाई दी. जब ग्रामीणों ने वहां खुदाई की तो शिवलिंग दिखाई दिया. इसके बाद ग्रामीणों ने सलेमपुर दरबार को इसकी जानकारी दी.

जंगल में मिले शिवलिंग के बाद शुरू हुई पूजा

सलेमपुर दरबार की ओर से गांव के भारती परिवार को मंदिर में पूजा-पाठ की जिम्मेदारी सौंपी गई. इसके बाद यहां विधिवत भगवान शिव की पूजा-अर्चना शुरू हुई और यह स्थान धीरे-धीरे गौरी शंकर मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हो गया.

ग्रामीणों का कहना है कि पीढ़ियों से भारती परिवार ही मंदिर में पूजा-अर्चना करता आ रहा है. आज भी इसी परिवार के वंशज मंदिर के पुजारी हैं.

अकाल में दूध से होती थी अनोखी पूजा

ग्रामीणों के अनुसार करीब 100 वर्ष पहले क्षेत्र में भयंकर अकाल पड़ा था. उस समय गौरी शंकर मंदिर में विशेष पूजा की गई. शिवलिंग के चारों ओर बांधनुमा घेरा बनाकर उसमें दूध भरने की परंपरा शुरू हुई.

मान्यता है कि जिस दिशा से दूध का घेरा टूटता था, उसी दिशा में बारिश शुरू हो जाती थी. इसके बाद जब भी क्षेत्र में अकाल या बारिश की कमी की आशंका होती, ग्रामीण इसी परंपरा के अनुसार मंदिर में पूजा-अर्चना करते थे.

मनोकामना मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है गौरी शंकर धाम

ग्रामीण सचिन कुमार सिंह ने बताया कि गौरी शंकर मंदिर मनोकामना मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है. वह करीब 30 वर्षों से यहां लगातार पूजा करते आ रहे हैं. उनका कहना है कि उन्होंने महादेव से अब तक जो भी मनोकामना मांगी, वह पूरी हुई.

मंदिर के पुजारी महाकांत भारती ने बताया कि उनके पूर्वज लगातार मंदिर में पूजा करते रहे हैं. सावन और भादो के महीने में यहां विशेष मेला लगता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.

मंदिर परिसर में विराजमान हैं माता गौरी

मंदिर परिसर में भगवान शिव के साथ माता गौरी की प्रतिमा भी स्थापित है. ग्रामीणों की मान्यता है कि सच्चे मन से यहां मांगी गई मनोकामना महादेव पूरी करते हैं. प्रत्येक रविवार को भी मंदिर परिसर में मेला लगता है.

तीर्थ स्थल के रूप में विकसित करने की मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से गौरी शंकर मंदिर को धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से विकसित कर तीर्थ स्थल का दर्जा देने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि सावन समेत अन्य अवसरों पर यहां हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं. मंदिर का विकास होने से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और क्षेत्र की धार्मिक पहचान को भी बढ़ावा मिलेगा.

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By Madhurendra kumar

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