जीवन के अंतिम समय में भगवत-स्मरण से कल्याण निश्चित है : प्रेमानंद

श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन स्वामी प्रेमानंद जी ने सुनाया मोक्ष का प्रसंग

फोटो-13- प्रवचन सुनती महिला श्रद्धालु प्रतिनिधि, सासाराम ग्रामीण शहर के गीता घाट कॉलोनी स्थित गीता घाट वेदा आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का समापन शनिवार को हो गया. समापन दिवस पर कथा पंडाल भक्ति, ज्ञान और विदाई के भावों से ओत-प्रोत रहा. स्वामी प्रेमानंद जी ने राजा परीक्षित के मोक्ष का मार्मिक प्रसंग सुनाया तथा कथा का सार समझाते हुए भक्तों को विदाई संदेश दिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि भागवत कथा का मुख्य प्रयोजन मोक्ष प्राप्ति है. राजा परीक्षित ने शुकदेव जी के मुख से सात दिन तक अनवरत कथा श्रवण किया, जिससे तक्षक नाग के काटने का भय समाप्त हो गया और वे मोक्ष को प्राप्त हुए. स्वामी जी ने कहा कि जीवन के अंतिम समय में भगवत-स्मरण से कल्याण निश्चित है. शुकदेव जी के त्याग, वैराग्य व ज्ञान की महिमा का गुणगान किया. कथा अंत में सुदामा चरित्र का संक्षिप्त वर्णन किया, जो निष्कपट प्रेम का सर्वोत्तम उदाहरण है. भक्तों से नाम जप, सेवा व सत्संग को दिनचर्या में स्थान देने का आग्रह किया. इस सात दिवसीय आयोजन ने शहर को भक्ति रंग में रंग दिया. आयोजकों ने स्वामी जी का आभार माना तथा पूर्णाहुति के बाद विशाल भंडारा सोमवार को आयोजित करने का निर्णय लिया़

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Published by: Anurag sharan

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