Rohtas THR Distribution Delay : रोहतास जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर पिछले दो माह से टेक होम राशन (टीएचआर) का वितरण नहीं होने से करीब 2.85 लाख लाभुक प्रभावित हैं. जून माह का राशन अब तक नहीं मिलने से लाभुकों में नाराजगी बढ़ रही है, जबकि सात माह से मानदेय लंबित रहने के कारण आंगनबाड़ी सेविकाएं भी आर्थिक संकट से जूझ रही हैं.
Rohtas News : फेस कैप्चर और मैसेज के बाद भी नहीं मिला राशन
जून महीने में लाभुकों का फेस कैप्चर कराया गया था और उनके मोबाइल पर टीएचआर वितरण का संदेश भी भेजा गया. इसके बावजूद अब तक पोषाहार का वितरण नहीं हो सका. रोजाना बड़ी संख्या में लाभुक आंगनबाड़ी केंद्रों पर पहुंचकर सेविकाओं से राशन के बारे में जानकारी ले रहे हैं.
दोबारा फेस कैप्चर के निर्देश से बढ़ी नाराजगी
बिहार राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन की जिला सचिव राजकुमारी देवी, जिला अध्यक्ष कुमारी संध्या, जिला महासचिव उमाकांत पांडेय (मीना पांडेय) और जिला उपाध्यक्ष इशरत जहां ने बताया कि अब जुलाई में दोबारा फेस कैप्चर कराने का निर्देश दिया जा रहा है. लाभुक पहले जून माह का लंबित टीएचआर देने की मांग कर रहे हैं. सेविकाओं का कहना है कि लोगों के सवालों का जवाब देते-देते वे परेशान हो चुकी हैं.
लाभुकों ने पहले लंबित टीएचआर देने की उठाई मांग
लाभुक प्रेमलता देवी, सुनील कुमार, प्रिया देवी, शिवम कुमार और सरोजनी कुमारी ने बताया कि जून में फेस कैप्चर कराने के बाद उनके मोबाइल पर टीएचआर मिलने का संदेश आया था, लेकिन पोषाहार नहीं मिला. उनका कहना है कि पहले जून माह का राशन दिया जाए, उसके बाद ही आगे की प्रक्रिया कराई जाए.
तकनीकी समस्या बनी वितरण में बाधा
सासाराम की बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) आशा कुमारी ने बताया कि पोषण ट्रैकर एप पर फेस रिकॉग्निशन सिस्टम (एफआरएस) अपलोड में देरी और अन्य तकनीकी कारणों से टीएचआर वितरण प्रभावित हुआ है. तकनीकी समस्या दूर होते ही लंबित राशन का वितरण जल्द शुरू कराया जाएगा.
3394 आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़े हैं 2.85 लाख लाभुक
पोषण ट्रैकर पोर्टल के अनुसार रोहतास जिले में 20 परियोजनाओं के तहत 3394 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जहां 3218 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कार्यरत हैं. जिले में कुल 2,85,491 लाभुक पंजीकृत हैं, जिनमें नवजात बच्चे, छह वर्ष तक के बच्चे, गर्भवती महिलाएं और धात्री माताएं शामिल हैं. लगातार दो माह से टीएचआर वितरण बाधित रहने से लाभुकों और सेविकाओं दोनों में असंतोष बढ़ता जा रहा है.
