अक्षर से जुड़े व्यक्तित्व का क्षरण नहीं हो पाता : साहित्यकार

Sasaram news. साहित्य संगम के बैनर तले कुशवाहा सभा भवन में आयोजित साहित्य समारोह में दिवंगत साहित्यकार राम लखन विद्यार्थी रचित भोजपुरी अतुकांत काव्य संग्रह और सीडी सिंह द्वारा संपादित पुस्तक परिदा खोजे बसेरा का विमोचन किया गया.

समारोह आयोजित कर पुस्तकों का हुआ विमोचन फोटो-24- पुस्तकों के विमोचन समारोह में उपस्थित साहित्यकार प्रतिनिधि, डेहरी साहित्य संगम के बैनर तले कुशवाहा सभा भवन में आयोजित साहित्य समारोह में दिवंगत साहित्यकार राम लखन विद्यार्थी रचित भोजपुरी अतुकांत काव्य संग्रह और सीडी सिंह द्वारा संपादित पुस्तक परिदा खोजे बसेरा का विमोचन किया गया. सीडी सिंह की अध्यक्षता में आयोजित उक्त कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ निर्मल कुमार सिंह, विशिष्ट अतिथि के रूप में साहित्यकार एवं सेवा निवृत प्रो डॉ राम आशीष सिंह, डीएवी स्कूल के शिक्षक निरंजन कुमार निर्भय, आभा सिंह व सुमन कुशवाह उपस्थित थीं. इस मौके पर मंच संचालन युवा आलोचक डॉ हरे राम सिंह ने पुस्तक में संकलित कविताओं के भाव- भाषा की तारतम्यता पर प्रकाश डाला. मंच पर उपस्थित विद्वत् जन बारी-बारी से इस पुस्तक में संकलित भोजपुरी कविताओं का पाठ किया. दिल की गहराइयों तक पहुंचने वाली कविताओं का पाठ सुनकर श्रोता मंत्र मुग्ध- से हो गये. मौके पर वक्ताओं ने कहा कि साहित्यकार अमर होता है. अक्षर से जुड़े व्यक्तित्व का क्षरण नहीं हो पता. वह चिरंतन सत्य को धारण कर लेता है, फिर देश- काल परिस्थितियां बदलती जाती हैं पर, उसकी मौजूदगी में कोई असर नहीं हो पाता.

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Published by: Anurag sharan

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