दो गज जमीन भी नसीब नहीं… अब खाक होने की जगह तलाश रहे गोड़ारी के मुर्दे
मुक्तिधाम के लिए तीन–चार दशक से मांग जारी, फाइलों में ही दम तोड़ती रही उम्मीद
काराकाट.
सारी उम्र इज्जत के साथ जिंदगी गुजारने की जद्दोजहद के बाद भी गोड़ारी नगर पंचायत के गरीब, दलित और मजदूर तबके को मरने के बाद दो गज जमीन तक नसीब नहीं हो पा रही है. यह किसी शायर की कल्पना नहीं, बल्कि उन लोगों की पीड़ा है, जिन्हें अंतिम संस्कार के लिए भी भटकना पड़ता है. विडंबना यह है कि नगर पंचायत की सत्ता आरक्षित सीट से चुनी गयी जनप्रतिनिधि के हाथ में होने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है. गोड़ारी नगर में मुक्तिधाम की मांग पिछले 30–40 वर्षों से उठती रही है, लेकिन फाइलों और दफ्तरों के बीच यह मांग दबती चली गयी. नगर पंचायत बनने के बाद जमीन की कीमतें बढ़ीं और अंतिम संस्कार के लिए उपलब्ध स्थल भी सिमटता चला गया. पहले एनएच-120 किनारे जमुआ पुल के पास अंतिम संस्कार होता था, लेकिन आबादी बढ़ने से वह स्थान भी अनुपयुक्त हो गया. मजबूरी में लोगों को अब नासरीगंज सोन नदी का रुख करना पड़ रहा है. नगरवासियों का कहना है कि पहले बाजार के पास मुक्तिधाम की जमीन थी, जो बाद में निजी हो गयी. सरकारी जमीन उपलब्ध होने के बावजूद प्रशासनिक चुप्पी कई सवाल खड़े करती है. सवाल यह है कि जब जीवन भर अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ा, तो क्या मृत्यु के बाद भी सम्मान का अधिकार नहीं मिलेगा. गोड़ारी नगर पंचायत की यह स्थिति व्यवस्था और प्रशासन दोनों के लिए आईना बन गयी है.क्या कहते हैं लोग
पंचायती राज के समय से ही मुक्तिधाम की मांग उठती रही. फाइलें चलीं, आश्वासन मिले, लेकिन आज तक समस्या का समाधान नहीं हुआ. अब नगर पंचायत बनने के बाद उम्मीद है कि यह पुरानी मांग पूरी होगी.अरविंद प्रसाद, पूर्व पैक्स अध्यक्ष
अंतिम संस्कार के लिए सोन नदी जाना हमारी मजबूरी है. यदि वहां जाने की व्यवस्था न हो तो समझ नहीं आता कि अंतिम संस्कार कहां किया जाये.
जय कुमार, गोड़ारी
आबादी लगातार बढ़ रही है, लेकिन जिम्मेदार चुप हैं. सरकारी जमीन रहते हुए भी मुक्तिधाम के लिए भूमि उपलब्ध नहीं करायी जा रही है.प्रमोद कुमार, गोड़ारी
मुक्तिधाम के लिए भूमि चिह्नित कर ली गयी है. वर्षों की मांग अब पूरी होने वाली है. बहुत जल्द जमीन को सार्वजनिक कर दिया जायेगा.रवीश रंजन, उपमुख्य पार्षद, नगर पंचायत गोड़ारी, काराकाट
भूमि चिह्नित हो चुकी है. नगरवासियों को परेशान होने की जरूरत नहीं है. उम्मीद है मार्च माह तक जमीन सार्वजनिक हो जायेगी.
सीमाब मतीन, इओ, नगर पंचायत गोड़ारी, काराकाटB
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
