सासाराम : राइस ट्रांसप्लांटर से शुरू हुई धान की रोपनी, 80% तक घटेगी मजदूरों पर निर्भरता

Sasaram News : सासाराम के नारायण कृषि विज्ञान संस्थान में राइस ट्रांसप्लांटर मशीन से धान की रोपनी शुरू हो गई है. इस आधुनिक तकनीक से श्रम की आवश्यकता 70-80% तक कम हो जाती है, जिससे किसानों को काफी फायदा होगा.

Sasaram News : गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय (जीएनएसयू) के अंतर्गत संचालित नारायण कृषि विज्ञान संस्थान में आधुनिक कृषि तकनीक को बढ़ावा देते हुए राइस ट्रांसप्लांटर मशीन से धान की रोपनी शुरू हुई. इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रति कुलाधिपति गोविंद नारायण सिंह मौजूद रहे. उन्होंने कृषि में आधुनिक मशीनों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए संस्थान के निदेशक प्रो. एचके सिंह व अधिष्ठाता प्रो. एसएस सिंह को इस नवाचार के लिए बधाई दी. साथ ही, संस्थान में और अधिक आधुनिक कृषि मशीनों को शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि छात्र-छात्राओं और किसानों को बदलते कृषि परिवेश के अनुरूप तकनीकी जानकारी मिल सके.

श्रम की आवश्यकता 70 से 80 प्रतिशत तक होगी कम

संस्थान के निदेशक प्रो. एचके सिंह ने कहा कि खरीफ मौसम में समय पर धान की रोपनी अच्छी उपज का आधार होती है. मजदूरों की कमी, बढ़ती मजदूरी और अनिश्चित मानसून के बीच राइस ट्रांसप्लांटर किसानों के लिए प्रभावी विकल्प बनकर उभरा है. वहीं, अधिष्ठाता प्रो. एसएस सिंह ने किसानों को बताया कि इस मशीन से कम समय में अधिक क्षेत्र में रोपनी संभव है. इससे श्रम की आवश्यकता 70 से 80 प्रतिशत तक कम हो जाती है और समान दूरी और गहराई पर रोपनी होने से पौधों का विकास बेहतर होता है, जिससे उत्पादन बढ़ने की संभावना रहती है.

बेहतर परिणाम के लिए तकनीकी प्रबंधन आवश्यक

शस्य विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. धनंजय ने किसानों को राइस ट्रांसप्लांटर के सफल उपयोग की तकनीकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इसके लिए 18 से 25 दिन की स्वस्थ मैट नर्सरी, खेत की बेहतर पडलिंग व समतलीकरण आवश्यक है. मशीन से रोपनी के बाद उचित जल व संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने पर बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं. इस मौके पर संस्थान के शिक्षक, छात्र-छात्राएं और किसान उपस्थित रहे.

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Author: Md aarif khan

Published by: Suryakant Kumar

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