Sasaram News:(संदेश जायसवाल) रोहतास के चेनारी नगर पंचायत चेनारी क्षेत्र में बाल श्रम और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं. रविवार की सुबह नगर क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में छोटे-छोटे बच्चे कूड़े के ढेर से प्लास्टिक, लोहे और अन्य कबाड़ की वस्तुएं चुनते हुए नजर आए. जहां एक ओर इन बच्चों की उम्र किताबें पढ़ने और स्कूल जाने की होती है, वहीं दूसरी ओर वे अपने भविष्य को संवारने के बजाय रोजी-रोटी की तलाश में कूड़े के ढेर में भटकते दिखे.
सुबह होते ही बोरा लेकर निकल पड़ते हैं बच्चे
स्थानीय लोगों कन्हैया शर्मा, अजय कुमार और डॉ. जयराम शर्मा के अनुसार, सुबह होते ही कई बच्चे हाथ में बोरा लेकर नगर क्षेत्र के कूड़ाघरों और सड़क किनारे जमा कचरे में उपयोगी सामान खोजने निकल पड़ते हैं. कूड़े के ढेर से उठती दुर्गंध और गंदगी के बीच काम करने से बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है. कई बार टूटे कांच, लोहे के टुकड़ों और अन्य खतरनाक वस्तुओं से चोट लगने की घटनाएं भी सामने आती हैं, जिससे उनकी सुरक्षा और अधिक जोखिम में पड़ जाती है.
सामाजिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर सवाल
नगर पंचायत चेनारी के स्थानीय नागरिकों धर्मेंद्र गुप्ता, विद्यानंद आर्य, विनोद जायसवाल सहित अन्य लोगों का कहना है कि यह स्थिति केवल आर्थिक मजबूरी का परिणाम नहीं, बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक विफलता का भी संकेत है.
लोगों का मानना है कि बच्चों को शिक्षा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि वे कूड़ा बीनने के बजाय विद्यालयों में शिक्षा प्राप्त कर सकें और अपने भविष्य को बेहतर बना सकें. स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें सरकारी योजनाओं और शिक्षा व्यवस्था से जोड़ा जाए, जिससे उनका जीवन सुधर सके.
अधिकारियों का बयान
इस मामले पर चेनारी नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी अभिषेक भारती ने कहा कि बच्चों के कूड़ा बीनने की जानकारी गंभीर विषय है. यदि इस तरह के मामले सामने आए हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी. उन्होंने कहा कि संबंधित विभागों और अभिभावकों के साथ समन्वय स्थापित कर बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा. साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि बाल श्रम किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है और बच्चों के हितों की रक्षा प्रशासन की प्राथमिकता है.
भविष्य की राह पर सवाल
यह मामला एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करता है कि समाज के सबसे कमजोर वर्ग के बच्चों तक शिक्षा और सुरक्षा की योजनाएं कितनी प्रभावी ढंग से पहुंच रही हैं. यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे मासूमों का भविष्य कूड़े के ढेर में ही सिमटने का खतरा बना रहेगा.
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