Sasaram News: चेनारी प्रखंड क्षेत्र में बीते दिन शुक्रवार को हुई मूसलाधार बारिश ईंट भट्ठा संचालकों और वहां दिन-रात पसीना बहाने वाले मजदूरों के लिए काल बनकर आई. भीषण और चिलचिलाती गर्मी के बीच हुई इस झमाझम बारिश से जहां एक ओर आम जनमानस को तपन से बड़ी राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर ईंट भट्ठों पर सूखने के लिए रखी गईं लाखों कच्ची ईंटें पानी में घुलकर जमींदोज हो गईं. अचानक बदले मौसम और चक्रवाती बारिश के कारण भट्ठा मालिकों को भारी आर्थिक चपत लगी है, तो वहीं लाचार मजदूरों की महीनों की गाढ़ी कमाई और कड़ी मेहनत भी पानी में बह गई.
हजारों ईंटों के ढेर ढहे, दोबारा उत्पादन शुरू करने में लगेगी दोगुनी लागत
भट्ठा संचालकों से मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को जब अचानक तेज गर्जना के साथ बारिश शुरू हुई, उस वक्त हजारों की संख्या में तैयार कच्ची ईंटें खुले आसमान के नीचे सूखने के लिए कतारबद्ध रखी थीं. अचानक आई तेज बौछारों के कारण बड़ी संख्या में ईंटें गलकर मिट्टी के ढेर में तब्दील हो गईं. कई स्थानों पर तो ईंटों के ऊंचे-ऊंचे ढेर भरभराकर ढह गए, जिससे चालू सीजन का पूरा उत्पादन कार्य ठप हो गया है. पीड़ित भट्ठा मालिकों का कहना है कि महज दो घंटे की इस बेमौसम बारिश ने उन्हें लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया है. अब दोबारा से मिट्टी तैयार करने और नई ईंटें ढालने में अतिरिक्त समय के साथ-साथ दोगुनी लागत लगेगी.
मेहनत पर फिरा पानी, मजदूरों के सामने खड़ा हुआ रोजी-रोटी का बड़ा संकट
ईंट भट्ठों पर कार्यरत मजदूर रवि कुमार, रावत सिंह, आशुतोष तथा महिला मजदूर चांदनी, अनीता और सीमा ने रुंधे गले से अपनी आपबीती सुनाई. उन्होंने बताया कि भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप में कई दिनों की हाड़-तोड़ मेहनत के बाद इन कच्ची ईंटों को ढाला गया था. बारिश ने हमारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है, जिससे हमारी तय मजदूरी का भारी नुकसान हुआ है. मजदूरों का कहना है कि जब तक भट्ठे सूख नहीं जाते और दोबारा नई ईंटें तैयार नहीं होंगी, तब तक उन्हें नियमित काम और हाजिरी नहीं मिल पाएगी. इस आपदा ने उनके परिवारों के सामने सीधे तौर पर भुखमरी और रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है.
सरकार और प्रशासन से आपदा राहत मुआवजे की पुरजोर मांग
बिक्रमगंज रोड के समीप संचालित भट्ठा मालिक बैकुंठ सिंह ने बताया कि शुक्रवार की इस बेमौसम बारिश ने उनके व्यापार की कमर तोड़कर रख दी है. उन्होंने कहा कि हजारों कच्ची ईंटें सीधे तौर पर बारिश की भेंट चढ़ गईं. ईंट निर्माण के लिए विशेष मिट्टी तैयार करने, ट्रैक्टर की ढुलाई, मजदूरों की पेशगी (एडवांस) और अन्य प्रशासनिक खर्चों में पहले ही मोटी रकम पूंजी के रूप में लग चुकी थी. ऐसे में इस प्राकृतिक मार से उन्हें गहरा आर्थिक झटका लगा है.
भट्ठा संचालकों ने स्थानीय प्रशासन और रोहतास जिलाधिकारी से इस तबाही का सर्वेक्षण कराकर प्राकृतिक आपदा के तहत उचित मुआवजा और राहत देने की गुहार लगाई है. व्यवसायियों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में मौसम का यही मिजाज रहा, तो इस साल क्षेत्र का पूरा ईंट कारोबार और कंस्ट्रक्शन सेक्टर पूरी तरह धाराशायी हो जाएगा.
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