चेनारी प्रखंड क्षेत्र के लांजी गांव के आगे दुर्गावती नदी पर बना रोहतास-कैमूर को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण पुल इन दिनों बदहाली का शिकार है. पुल के पथ में जगह-जगह दरारें पड़ गयी हैं. कई स्थानों पर गड्ढे बन गये हैं और पथ की गिट्टी उखड़ने के कारण सरिया बाहर दिखाई देने लगा है. बारिश के मौसम में पुल पर पानी जमा होने से स्थिति और गंभीर हो गयी है.
पुल पर कई जगहों पर क्षतिग्रस्त प्वाइंट
करीब 200 मीटर लंबे इस पुल से चेनारी प्रखंड क्षेत्र के साथ रोहतास जिले के लांजी सहित आसपास के गांवों के लोगों का आवागमन होता है. स्थानीय लोगों के अनुसार, पुल के पथ पर आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर क्षतिग्रस्त प्वाइंट हैं. इनमें पांच-छह जगहों पर दरारें स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं. बारिश के दौरान पुल के ऊपर पानी जमा होकर झील जैसा नजारा बना देता है.
पानी के रिसाव की आशंका से बढ़ी चिंता
दरारों में पानी भरने से पथ के अंदर पानी के रिसाव की आशंका भी बनी हुई है. पानी के बीच से वाहनों के गुजरने के कारण क्षतिग्रस्त हिस्सों को और नुकसान पहुंचने की आशंका है. ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते पुल की मरम्मत नहीं हुई तो कभी भी आवागमन प्रभावित हो सकता है.
1966 के अकाल के बाद हुआ था पुल का निर्माण
जानकारों के अनुसार, दुर्गावती नदी पर बने इस पुल का निर्माण सोन उच्चस्तरीय नहर सिंचाई विभाग द्वारा 1966 के अकाल के बाद कराया गया था. करीब 200 मीटर लंबे पुल का निर्माण पूरा होने के बाद वर्ष 1971 में इसका उद्घाटन किया गया था. पुल के नीचे दुर्गावती नदी की धारा बहती है, जबकि पुल के बीच से सोन उच्चस्तरीय नहर गुजरती है.
सिंचाई विभाग के वाहनों के लिए बना था पुल
नहर में पानी अधिक होने पर तीन फॉल के माध्यम से अतिरिक्त पानी दुर्गावती नदी की ओर गिराया जाता है. बताया जाता है कि शुरुआत में पुल का निर्माण सिंचाई विभाग के वाहनों के आवागमन के लिए किया गया था. बाद में आम लोगों के लिए भी आवागमन शुरू हो गया. पहले पुल से मुख्य रूप से छोटी गाड़ियां गुजरती थीं, लेकिन अब बड़े और भारी वाहनों का भी लगातार परिचालन हो रहा है.
पांच वर्ष पहले हुई थी पीसीसी ढलाई
लांजी गांव निवासी विकास कुमार यादव उर्फ सोनू यादव सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि करीब पांच वर्ष पहले पुल के पथ में दरारें आने के बाद लाखों रुपये की लागत से पीसीसी ढलाई करायी गयी थी. ढलाई में नीचे सरिया भी डाला गया था. ग्रामीणों का आरोप है कि मरम्मत के दौरान संवेदक द्वारा मानक के अनुरूप सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया गया.
मरम्मत के छह माह बाद फिर दिखी दरार
ग्रामीणों के अनुसार, मरम्मत के महज छह माह बाद ही पथ में दोबारा दरारें दिखाई देने लगी थीं. समय के साथ दरारें बढ़ती गयीं और कई जगह पीसीसी पथ धंसने से सरिया बाहर निकल आया. ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति एक-दो स्थानों पर नहीं, बल्कि पुल के कई हिस्सों में बनी हुई है.
ग्रामीणों ने मरम्मत की गुणवत्ता पर उठाये सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि करीब पांच वर्ष पहले करायी गयी पीसीसी ढलाई के दौरान ही काम की गुणवत्ता को लेकर शिकायत की गयी थी. इसके बावजूद संबंधित विभाग के अधिकारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया. अब कई जगह पीसीसी धंसने से सरिया बाहर निकल आया है. लोगों ने पूरे पुल की तकनीकी जांच कराने की मांग की है.
पुल की तत्काल मरम्मत की मांग
ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग और पथ निर्माण विभाग से पुल की तकनीकी जांच कराकर क्षतिग्रस्त पथ की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है. लोगों ने जल निकासी की व्यवस्था कराने की भी मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते मरम्मत नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है और आवागमन बंद होने की नौबत आ सकती है.
संबंधित विभाग से पत्राचार करेगा प्रशासन
इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रियंका कुमारी ने बताया कि दुर्गावती नदी पर बने पुल में कुछ जगहों पर सरिया दिखाई दे रहा है. इस संबंध में संबंधित विभाग के अधिकारी से पत्राचार किया जाएगा. तत्काल मरम्मत के लिए संबंधित विभाग को पत्र लिखे जाने की बात कही गयी है.
