सासाराम सदर. जिले में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए चल रही परियोजनाओं को समय पर पूरा कराने की कवायद तेज हो गई है. शनिवार की शाम जिलाधिकारी दीपक कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में विभिन्न पेयजल एवं सीवरेज परियोजनाओं की समीक्षा बैठक हुई. इसमें निर्माणाधीन योजनाओं की प्रगति, गुणवत्ता और समय-सीमा पर विस्तार से चर्चा की गई.
परियोजनाओं में तेजी और गुणवत्ता पर जोर
बैठक में सिंचाई प्रमंडल डेहरी, जल संसाधन विभाग, बुडको रोहतास और निर्माणाधीन जलशोधन संयंत्र, WTP की कार्यकारी एजेंसी NCC के अधिकारी व अभियंता शामिल हुए. डीएम ने परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति की जानकारी लेते हुए काम में तेजी लाने और गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नहीं करने पर जोर दिया.
सासाराम और डेहरी में छह जलमीनारों पर फोकस
अमृत 2.0 के तहत नगर निगम सासाराम और नगर परिषद डेहरी डालमियानगर में जलापूर्ति परियोजनाओं पर विशेष चर्चा हुई. दोनों शहरी निकायों में कुल छह जलमीनारों का निर्माण कराया जा रहा है. इनमें तीन जलमीनार सासाराम नगर निगम और तीन डेहरी डालमियानगर नगर परिषद क्षेत्र में बनाए जा रहे हैं.
WTP से जलमीनारों को उपलब्ध कराया जाएगा पानी
बैठक में डेहरी में जल संसाधन विभाग द्वारा निर्माणाधीन WTP से इन जलमीनारों के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने को लेकर निर्णय लिया गया. इससे परियोजनाओं के पूरा होने के बाद संबंधित क्षेत्रों में जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है.
न्यू गंगौली में जलमीनार निर्माण के लिए जमीन का रास्ता खुला
डेहरी डालमियानगर क्षेत्र के न्यू गंगौली में जलमीनार निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध कराने का मामला भी बैठक में उठा. जल संसाधन विभाग के अधीन 25 मीटर x 30 मीटर जमीन के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र, NOC जारी करने पर सहमति बनी.
मंगलवार तक NOC जारी करने की होगी कार्रवाई
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने आगामी मंगलवार तक इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई पूरी कर NOC जारी करने की बात कही. इससे न्यू गंगौली में प्रस्तावित जलमीनार के निर्माण का रास्ता साफ होने की उम्मीद है.
क्षतिग्रस्त बुडको पाइपलाइन की मरम्मत करेगी NCC
WTP से जुड़ी पाइपलाइन बिछाने के दौरान बुडको की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने का मुद्दा भी बैठक में उठा. इस पर सहमति बनी कि निर्माण कार्य के दौरान क्षतिग्रस्त हुई या आगे क्षतिग्रस्त होने वाली बुडको की पाइपलाइन की पूर्ण मरम्मत NCC द्वारा कराई जाएगी. इससे पेयजल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका कम होगी.
