Rohtas Sand Boa Snake: रोहतास महिला कॉलेज के वरीय सहायक प्राध्यापक डॉ अमरजीत कुमार के कंपाउंड से एक सैंड बोआ सांप पकड़ा गया. सांप को लेकर लोगों में कई तरह की धारणाएं हैं. शांति प्रसाद जैन महाविद्यालय सासाराम के जन्तुविज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ गौरव कुमार ने बताया कि कॉमन सैंड बोआ पूरी तरह विषहीन और शांत स्वभाव का सांप है.
दोमुंहा सांप होने की धारणा महज अंधविश्वास
डॉ गौरव कुमार ने बताया कि भारत में सैंड बोआ को आमतौर पर दोमुंहा सांप या मिट्टी वाला सांप भी कहा जाता है. इसके दोमुंहा होने की बात महज अंधविश्वास है. इसका सिर्फ एक ही मुंह होता है. उन्होंने बताया कि शिकारियों को भ्रमित करने और खुद को बचाने के लिए यह अपनी मोटी और गोल पूंछ को सिर की तरह हिलाता है. इसी वजह से लोगों को इसके दो सिर होने का भ्रम होता है.
उन्होंने कहा कि सैंड बोआ के छह महीने एक मुंह और छह महीने दूसरे मुंह से चलने जैसी बातें भी गलत हैं.
धनवर्षा और अलौकिक शक्तियों से जुड़े अंधविश्वास
डॉ गौरव कुमार ने बताया कि सैंड बोआ को लेकर धनवर्षा और अलौकिक शक्तियों से जुड़े कई अंधविश्वास भी प्रचलित हैं. कुछ लोग इसे घर में रखने या तांत्रिक क्रियाओं में इस्तेमाल करने से गुप्त खजाना मिलने, धनवर्षा होने और बीमारियां ठीक होने की बात मानते हैं. उन्होंने कहा कि इन दावों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है.
उन्होंने बताया कि ऐसे अंधविश्वासों के कारण सैंड बोआ की अवैध तस्करी भी होती है. सैंड बोआ के वजन को लेकर भी कई तरह की भ्रांतियां हैं. कुछ लोगों का दावा है कि अधिक वजन होने पर इसके अंदर इरिडियम जैसी मूल्यवान धातु या कोई चमत्कारी तत्व होता है. डॉ गौरव कुमार ने इसे वैज्ञानिक रूप से निराधार बताया.
वजन बढ़ाने के लिए सांप को खिलाई जाती हैं धातुएं
डॉ गौरव कुमार ने बताया कि तस्कर सैंड बोआ का वजन बढ़ाने के लिए इसे सीसे की गोलियां या धातु खिलाने जैसी क्रूर गतिविधियां करते हैं, जिससे सांप की मौत तक हो सकती है.
उन्होंने बताया कि सैंड बोआ के खुरदरे और मोटे शरीर के कारण कई लोग इसे जहरीला समझ लेते हैं, जबकि यह पूरी तरह विषहीन और सामान्य तौर पर हानिरहित है. यह खेतों में चूहों और कीड़ों को खाकर पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी भूमिका निभाता है.
