Sasaram News(जितेन्द्र कुमार पासवान): मानसून सत्र की आहट के साथ ही रोहतास जिले में बालू घाट संचालकों के बीच बालू का स्टॉक (भंडारण) करने की अंधी होड़ मच गई है. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के कड़े दिशा-निर्देशों के तहत आगामी 15 जून के बाद जिले के सभी बालू घाटों पर खनन कार्य पूरी तरह से प्रतिबंधित हो जाएगा. यह पाबंदी 15 अक्टूबर तक यानी पूरे चार महीने प्रभावी रहेगी. इस विधिक बंदिश को देखते हुए घाट संचालक दिन-रात मशीनों और गाड़ियों के जरिए बालू जमा करने में जुटे हैं, ताकि बरसात के सीजन में स्टॉक किए गए बालू को ऊंचे दामों पर बेचकर तगड़ा मुनाफा कमाया जा सके.
कछवां से नासरीगंज तक दिन-रात उठ रहा बालू; सोन नदी में बढ़ेगा जलस्तर
जानकारी के अनुसार, रोहतास जिले के कछवां और नासरीगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत पडुरी से लेकर कछवां तक संचालित चार प्रमुख बड़े बालू घाटों के अलावा इंद्रपुरी, तिलौथू और चकन्हवा समेत अन्य सभी अधिसूचित घाटों पर भंडारण का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है. तड़के सुबह से लेकर देर रात तक सैकड़ों ट्रैक्टरों और भारी-भरकम हाईवा गाड़ियों के माध्यम से बालू का उठाव और डंपिंग यार्डों में भंडारण किया जा रहा है. घाट संचालकों का साफ कहना है कि बरसात के दिनों में सोन नदी का जलस्तर अत्यधिक बढ़ जाने के कारण पानी के भीतर से बालू का सुरक्षित खनन करना पूरी तरह असंभव हो जाता है. इसलिए मानसून से पहले तय कोटे का अधिक से अधिक बालू जमा करना उनकी व्यावसायिक मजबूरी है.
आम जनता की जेब पर डाका! बालू महंगा होने की आशंका और मजदूरों का पलायन
बालू घाटों के लगातार चार महीने तक बंद रहने का सीधा और तगड़ा असर आम जनता और विकास कार्यों पर पड़ने वाला है. आगामी दिनों में सरकारी और निजी निर्माण कार्य बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है. खासकर अपना आशियाना (मकान) बनाने वाले आम मध्यमवर्गीय लोगों को अब बाजार में ऊंचे और मनमाने दामों पर बालू खरीदना पड़ सकता है. बाजार के जानकारों के मुताबिक, स्टॉक किए गए बालू की लोडिंग-अनलोडिंग और अतिरिक्त ढुलाई खर्च जुड़ने से बाजार में बालू की कृत्रिम किल्लत पैदा कर कीमतें आसमान पर पहुंचा दी जाती हैं. बालू घाटों के बंद होने का सबसे काला और मानवीय पहलू यह है कि इससे जुड़े हजारों दैनिक मजदूरों के सामने भुखमरी और रोजगार का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा. स्थानीय श्रमिकों के साथ-साथ पड़ोसी जिलों से आए मजदूर भी इन्हीं घाटों पर मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालते हैं. काम बंद होने के बाद एक बार फिर इन मजदूरों का रोजी-रोटी की तलाश में दिल्ली, पंजाब और मुंबई जैसे दूसरे राज्यों की ओर बड़े पैमाने पर पलायन होना लगभग तय माना जा रहा है.
प्रशासन सख्त: सहायक निदेशक रणधीर कुमार सिंह ने दी कार्रवाई की चेतावनी
इस पूरे मामले पर खनन विभाग पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है. जिला खनन विभाग के सहायक निदेशक रणधीर कुमार सिंह ने कड़े लहजे में बताया कि 15 जून की मध्य रात्रि से सोन नदी से बालू के किसी भी प्रकार के उठाव और खनन पर पूर्ण विधिक रोक लागू कर दी जाएगी.
उन्होंने नियमों की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि सभी वैध घाट संचालकों को नियमतः अपने आवंटित घाट से महज 300 मीटर के दायरे के भीतर ही बालू स्टॉक करने की प्रशासनिक अनुमति दी गई है. यदि कोई भी संचालक निर्धारित 300 मीटर की सीमा से बाहर या अवैध तरीके से बालू का भंडारण करता हुआ पाया गया, तो उसके खिलाफ खनिज अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि सुरक्षा मानकों के तहत बालू स्टॉक करने की अधिकतम मात्रा को लेकर फिलहाल कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई है.
