रावण वध की तैयारी जोरों पर, कुंभकरण और मेघनाथ का पुतला नहीं होगा दहन

SASARAM NEWS.अनुमंडल स्तर पर रोहतास क्लब मैदान में स्थानीय दुर्गा पूजा समिति की ओर से रावण का पुतला बनाने की तैयारी जोरों पर है. इस बार मैदान में कुंभकरण और मेघनाथ के पुतलों का दहन नहीं होगा. करीब दो लाख रुपये की लागत से नवमी के दिन रावण के पुतले को तैयार करने का काम चल रहा है.

लगभग दो लाख की लागत से नवमी के दिन रावण बनकर होगा तैयार तीन टन लकड़ी से 60 फीट ऊंचा व 10 फीट चौड़ा बनेगा रावण 15 सितंबर से स्थानीय कारीगरों ने रावण बनाने का काम किया था प्रारंभ प्रतिनिधि, डालमियानगर अनुमंडल स्तर पर रोहतास क्लब मैदान में स्थानीय दुर्गा पूजा समिति की ओर से रावण का पुतला बनाने की तैयारी जोरों पर है. इस बार मैदान में कुंभकरण और मेघनाथ के पुतलों का दहन नहीं होगा. करीब दो लाख रुपये की लागत से नवमी के दिन रावण के पुतले को तैयार करने का काम चल रहा है. लगभग तीन टन लकड़ी से बनने वाला यह पुतला 60 फीट ऊंचा और 10 फीट चौड़ा होगा. पुतला निर्माण का कार्य स्थानीय कारीगरों ने 15 सितंबर से शुरू किया था. करीब तीन फीट ऊंची गर्दन और 10 फीट लंबे हाथों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है. एक हाथ में तीर और दूसरे हाथ में ढाल प्रदर्शित होगी. पुतले को आकर्षक बनाने के लिए लगभग 80 मीटर सफेद और रंग-बिरंगे कपड़ों से पोशाक तैयार की जा रही है. निर्माण कार्य पूरा होने के बाद दहन के दौरान आतिशबाजी और ध्वनि प्रभाव के लिए हजारों रुपये की लागत से अलग-अलग पटाखे लगाये जायेंगे. दुर्घटना से बचाव के लिए पुतले को रिमोट कंट्रोल से जलाने की तैयारी की गयी है. रावण दहन से पूर्व हर वर्ष की तरह इस बार भी देश में शांति और समृद्धि की कामना के लिए मुख्य अतिथि द्वारा कबूतर, नीलकंठ और गुब्बारे छोड़े जायेंगे. समिति ने इसकी भी तैयारी कर ली है. हालांकि, इस बार कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले नहीं बनने से श्रद्धालु निराश हैं. समिति के अध्यक्ष राजू सिंह ने बताया कि इस बार मौसम अनुकूल नहीं रहने और लकड़ी सूखने में कठिनाई के कारण केवल रावण दहन की योजना पर काम किया जा रहा है. समिति के संरक्षक प्रफुल्ल श्रीवास्तव ने बताया कि वृद्धजनों के अनुसार 1930 से रोहतास क्लब मैदान में रावण दहन की परंपरा जारी है . पहले इस आयोजन में रोहतास उद्योग समूह का महत्वपूर्ण योगदान रहा, लेकिन उद्योग बंद होने के बाद स्थानीय समिति बनाकर दुर्गा पूजा और रावण दहन की परंपरा को जारी रखा गया है . उन्होंने कहा कि रावण पुतले के निर्माण में हर वर्ष रोहतास उद्योग के प्रबंधक का भी योगदान रहता आया है .

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Published by: Anurag sharan

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