Sasaram News : तेंदुनी चौक के बीचोंबीच नहर किनारे झोपड़ी में रहने वाली करीब नौ माह की गर्भवती लक्ष्मी देवी के गर्भ में ही बच्चे की मौत हो गयी. महिला तेज दर्द से तड़प रही थी और उस समय उसकी मदद के लिए कोई मौजूद नहीं था. ऐसे मुश्किल समय में वार्ड 25 की आशा कार्यकर्ता सोनी उसके लिए सहारा बनीं और इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाने की पहल की.
अल्ट्रासाउंड में गर्भ में बच्चे की मौत की हुई पुष्टि
आशा कार्यकर्ता सोनी को जैसे ही लक्ष्मी देवी की हालत की जानकारी मिली, वह उसे लेकर अल्ट्रासाउंड कराने पहुंचीं. जांच के दौरान बच्चे की गर्भ में ही मौत की पुष्टि हुई. इसके बाद सोनी महिला को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की कोशिश में जुट गयीं.
नहर निरीक्षण के दौरान झोपड़ी के पास पहुंचे एसडीएम
इसी दौरान संयोग से अनुमंडलाधिकारी दिलीप कुमार नहर का निरीक्षण करते हुए उसी झोपड़ी के पास पहुंच गये. एसडीएम को देखते ही आशा कार्यकर्ता सोनी ने उनसे मुलाकात कर लक्ष्मी देवी की पूरी स्थिति बतायी. महिला की हालत की जानकारी मिलते ही एसडीएम ने तत्काल अपने स्कॉट वाहन से उसे अनुमंडलीय अस्पताल भेजवाया.
अस्पताल प्रभारी को फोन कर तत्काल इलाज का दिया निर्देश
एसडीएम दिलीप कुमार ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही अस्पताल प्रभारी को फोन कर महिला की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया. इसके बाद लक्ष्मी देवी को अनुमंडलीय अस्पताल लाया गया. हालांकि, अस्पताल पहुंचने के बाद भी उसकी परेशानी कम नहीं हुई.
इमरजेंसी में ओटी नहीं होने से सासाराम किया गया रेफर
अनुमंडलीय अस्पताल में इमरजेंसी के लिए ऑपरेशन थिएटर की व्यवस्था नहीं होने के कारण लक्ष्मी देवी को बेहतर इलाज के लिए सासाराम सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया. जिस महिला को आशा कार्यकर्ता ने खोजकर अस्पताल तक पहुंचाया और एसडीएम ने तत्काल सरकारी वाहन उपलब्ध कराया, उसे अनुमंडलीय अस्पताल में समुचित व्यवस्था नहीं मिलने के कारण उच्च अस्पताल भेजना पड़ा.
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उपाधीक्षक बोले- बीपी और पल्स सामान्य, हीमोग्लोबिन की कमी
अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. अभिनंदन कुमार ने बताया कि लक्ष्मी देवी को शाम करीब पांच बजे अस्पताल लाया गया था. उसका बीपी और पल्स सामान्य था, लेकिन हीमोग्लोबिन की कमी थी. उन्होंने बताया कि इमरजेंसी में ओटी की व्यवस्था नहीं है. अस्पताल में दो महिला चिकित्सक हैं, लेकिन वे अपनी ड्यूटी पूरी कर जा चुकी थीं. ऐसी स्थिति में महिला का इलाज यहां संभव नहीं था, इसलिए उसे सासाराम सदर अस्पताल रेफर किया गया.
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सोनी नहीं होतीं तो मुश्किल में पड़ सकती थी लक्ष्मी
पूरे घटनाक्रम में आशा कार्यकर्ता सोनी की संवेदनशीलता और एसडीएम दिलीप कुमार की तत्परता उम्मीद जगाती है. लेकिन, दूसरी ओर अनुमंडलीय अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल भी खड़े होते हैं. गर्भ में बच्चे की मौत के बाद खुद तेज दर्द से जूझ रही महिला को तत्काल चिकित्सा सुविधा की जरूरत थी. ऐसे में इमरजेंसी में जरूरी व्यवस्था उपलब्ध नहीं होने से उसे बड़े अस्पताल रेफर करना पड़ा. यह घटना अनुमंडलीय स्तर पर आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को और मजबूत किए जाने की जरूरत को सामने लाती है.
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