15 अगस्त विशेष: जब अंग्रेजों ने गोलियों से भून डाला क्रांतिकारी चेत पांडेय को, पढ़ें करगहर के इस गुमनाम नायक की अमर गाथा

Rohtas Kargahar Freedom Fighter Chet Pandey: जानिए महान क्रांतिकारी चेत पांडेय की शौर्य गाथा, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ जंग लड़ी और किसानों के लिए ऐतिहासिक नाले का निर्माण कराया.

Rohtas Kargahar Freedom Fighter Chet Pandey: ब्रितानी हुकूमत के खिलाफ जंग और आजादी की अलख जगाने का ख्याल आते ही कई महानायकों के चेहरे बरबस याद आ जाते हैं. लेकिन इतिहास के पन्नों में कुछ ऐसे भी वीर योद्धा दर्ज हैं जो आज गुमनामी के अंधेरे में खो चुके हैं. रोहतास जिले के करगहर क्षेत्र के ऐसे ही एक महान क्रांतिकारी थे चेत पांडेय, जिन्होंने 1857 की क्रांति के दौर में अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे और अंततः भारत माता की रक्षा करते हुए अपनी शहादत दी थी.

खरवारों को पराजित कर पाई थी 385 गांवों की जमींदारी

इतिहास के जानकारों के अनुसार, चेत पांडेय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के चंद्रावत गांव के निवासी थे. वे सन 1830 ईस्वी में करगहर (जो उस समय 'खड्गर' के नाम से जाना जाता था) आए थे. उस समय वहां खरवार समुदाय का वर्चस्व था. चेत पांडेय ने उनकी अधीनता स्वीकार करने के बजाय उनसे लोहा लिया और उन्हें बुरी तरह पराजित किया.

उनकी अप्रतिम बहादुरी और युद्ध कौशल से प्रभावित होकर नोखा के तत्कालीन राजा रुद्र प्रताप सिंह ने उन्हें 385 गांवों की जमींदारी सौंप दी. इसके बाद चेत पांडेय ने क्षेत्र में सैकड़ों कुएं, अष्टकोणीय कुएं, धर्मशालाएं और करगहर का प्राचीन शिव मंदिर बनवाकर जनकल्याणकारी कार्यों की मिसाल पेश की.

385 गांवों का लगान बंद कर अंग्रेजों को ललकारने वाले वीर योद्धा चेत पांडेय। AI Generated

धुआंकुंड से कोचस तक खुदवाया नाला, युद्ध में तौला गया सवा शेर जनेऊ

कृषि और सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए उन्होंने वर्ष 1840 में कैमूर पहाड़ी पर स्थित धुआंकुंड से लेकर कोचस स्थित धर्मावती नदी तक एक विशाल सिंचाई नाले की खुदाई करवाई. इस खुदाई के दौरान अमवलिया और मुरादाबाद में स्थानीय सामंतों से उनका भीषण युद्ध हुआ.

कहा जाता है कि इस युद्ध में उनके परिवार और वंशजों के सैकड़ों लोग शहीद हो गए थे. शहादत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शहीदों के शवों से उतारे गए जनेऊ का वजन सवा शेर हुआ था.

वीर कुंवर सिंह के साथ मिलाया हाथ, अंग्रेजों को टैक्स देना किया बंद

आगे चलकर चेत पांडेय ने किसानों को संगठित किया और जगदीशपुर के अमर सेनानी वीर कुंवर सिंह के साथ हाथ मिला लिया. उन्होंने अपने अधिकार वाले सभी 385 गांवों का लगान (टैक्स) अंग्रेजों को देना पूरी तरह बंद कर दिया. इससे बौखलाए अंग्रेज उनके जानी दुश्मन बन गए. अंग्रेजों में उनके नाम का इतना खौफ था कि वे करगहर थाने में तभी कदम रखते थे, जब उन्हें पक्का यकीन होता था कि चेत पांडेय क्षेत्र से बाहर हैं.

वर्ष 1867 में सासाराम स्थित सलीम शाह के मकबरे के समीप अंग्रेजों और चेत पांडेय के बीच भीषण मुठभेड़ हुई, जहां अंग्रेजों ने धोखे से घेरकर इस महान क्रांतिकारी को गोलियों से भून डाला.

अंग्रेजों से लोहा लेने वाले करगहर के 'चेत पांडेय': शहादत और बहादुरी की अमर गाथा। AI Generated

वंशजों में आज भी जीवित है परंपरा

आज भी करगहर और आसपास के दर्जनों गांवों में चेत पांडेय के वंशज निवास करते हैं. उनके प्रति अगाध श्रद्धा का आलम यह है कि आज भी जब उनके परिवार या वंशज के घर कोई नवजात बालक जन्म लेता है, तो उसके सिरहाने सर्वप्रथम महान योद्धा चेत पांडेय की ऐतिहासिक तलवार रखी जाती है.

प्रशासनिक उपेक्षा से अस्तित्व खो रहा शहीदों के खून से सिंचा नाला

जिस सिंचाई नाले को खुदवाने के लिए चेत पांडेय और उनके सैकड़ों वंशजों ने शहादत दी थी, आज वह प्रशासनिक उदासीनता के कारण अपने अस्तित्व के लिए जूझ रहा है. धुआंकुंड से लेकर कोचस तक इस नाले पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण कर लिया गया है.

सासाराम के फैजलगंज से लेकर करगहर तक भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों ने इस पर पक्के मकान बना लिए हैं. नतीजतन, कई गांवों में सिंचाई व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है और बरसात के दिनों में जलजमाव व बाढ़ जैसी विकट समस्या पैदा हो जाती है.

Also Read: रोहतास के पांच राजकीय डिग्री कॉलेजों की डीएम ने की समीक्षा, सुविधाएं बढ़ाने और नियमित कक्षा संचालन पर जोर


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Rajnikant pandey

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >