रोहतास जिले के किसान अब पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक खेती की ओर भी तेजी से बढ़ रहे हैं. जिले के संझोली, करगहर, कोचस, नोखा और सासाराम प्रखंड में मत्स्य पालन को बढ़ावा मिल रहा है. इसी कड़ी में नोखा प्रखंड के शेखपुरवा गांव निवासी किसान धर्मवीर कुमार तीन बीघे के पोखर में झींगा मछली पालन कर रहे हैं. उन्होंने झींगा पालन को आमदनी का बेहतर जरिया बनाकर दूसरे किसानों को भी आधुनिक खेती के लिए प्रेरित किया है.
तीन बीघे के पोखर में शुरू किया झींगा पालन
किसान धर्मवीर कुमार ने बताया कि झींगा मछली पालन की प्रेरणा उन्हें कृषि विज्ञान केंद्र रोहतास, बिक्रमगंज से मिली. केंद्र प्रभारी सह वरीय वैज्ञानिक रविंद्र कुमार जलज से जानकारी लेने के बाद उन्होंने अपने पोखर की साफ-सफाई कर झींगा पालन शुरू किया. उनका कहना है कि नए तरीके से खेती करने की इच्छा ने उन्हें इस दिशा में आगे बढ़ाया.
ओडिशा से मंगाया 20 हजार झींगा का बीज
धर्मवीर कुमार ने बताया कि पोखर की साफ-सफाई के बाद ओडिशा से झींगा मछली का बीज यानी जीरा मंगाया गया. करीब 20 हजार झींगा के बीज पोखर में डाले गये हैं. किसान अब इनकी नियमित देखभाल कर रहे हैं और बेहतर उत्पादन की उम्मीद है.
120 दिन में 100 ग्राम तक होगा एक झींगा
किसान धर्मवीर कुमार के अनुसार झींगा मछली करीब 120 दिनों में तैयार हो जाती है. अभी उनके पोखर में झींगा का वजन करीब 50 ग्राम तक पहुंच गया है. पूरी तरह तैयार होने के बाद एक झींगा का वजन करीब 100 ग्राम तक होने की उम्मीद है.
एक हजार रुपये किलो तक मिल सकता है भाव
धर्मवीर कुमार ने बताया कि झींगा मछली की कीमत करीब एक हजार रुपये प्रति किलो तक मिल जाती है. इससे किसानों को कम समय में बेहतर आमदनी होने की संभावना रहती है. यही वजह है कि वह दूसरे किसानों को भी झींगा पालन अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.
झींगा को दिया जाता है हाई प्रोटीन दाना
झींगा के बेहतर विकास के लिए दिन में एक से दो बार सिंकिंग हाई प्रोटीन दाना दिया जाता है. किसान के अनुसार, नियमित आहार और पोखर की साफ-सफाई का झींगा पालन में विशेष महत्व है.
स्वतंत्रता दिवस पर किसान को किया गया सम्मानित
धर्मवीर कुमार के झींगा पालन को लेकर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी दीपक कुमार मिश्र, तत्कालीन पुलिस अधीक्षक रौशन कुमार और उप विकास आयुक्त ने उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था. झींगा पालन के क्षेत्र में उनके प्रयास को जिले में आधुनिक कृषि की दिशा में एक उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है.
झींगा पालन में लागत के अनुपात में अच्छी आय
केवीके के मत्स्य वैज्ञानिक आरके जलज ने बताया कि झींगा मछली स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होती है. इसके पालन में लागत के अनुपात में उत्पादक को अच्छी आय मिल सकती है. उन्होंने बताया कि झींगा मछली को रोहू और कतला के साथ भी एक ही पोखर में पाला जा सकता है. यह रोजाना वर्गी प्रजाति का झींगा होता है, जिसे उचित देखभाल के साथ पालने पर किसानों को बेहतर लाभ मिल सकता है.
