Sasaram News : हिंदी केवल भाषा नहीं, हमारी संस्कृति और अस्मिता की पहचान : डीइओ

14 सितंबर 1949 को भारतीय संविधान सभा ने हिंदी को भारत की राजभाषा का दर्जा दिया था, तभी से प्रत्येक वर्ष यह दिन हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है.

सासाराम ऑफिस. 14 सितंबर 1949 को भारतीय संविधान सभा ने हिंदी को भारत की राजभाषा का दर्जा दिया था, तभी से प्रत्येक वर्ष यह दिन हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है. इसी कड़ी में रविवार को जिला मुख्यालय सासाराम के मल्टीपरपज हॉल में शिक्षा विभाग की ओर से हिंदी दिवस पर विचार-गोष्ठी सह कवि सम्मेलन का आयोजन बड़े उत्साह के साथ हुआ. कार्यक्रम का उद्घाटन जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीइओ) मदन राय सहित अन्य लोगों ने दीप जलाकर किया. डीइओ ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी आज केवल भाषा का माध्यम नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, सभ्यता और राष्ट्रीय एकता की पहचान है. उन्होंने कहा कि जनगणना 2011 के अनुसार देश की 57 प्रतिशत आबादी हिंदी बोलती और समझती है. आज हिंदी न सिर्फ भारत में बल्कि अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड, मॉरीशस, फिजी और खाड़ी देशों तक अपनी पहचान बना चुकी है. उन्होंने कहा कि इंटरनेट पर हिंदी दुनिया की तीसरी सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली भाषा बन चुकी है. संयुक्त राष्ट्र संघ सहित कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदी की गूंज सुनायी देती है. हिंदी हमारी सोच, अस्मिता और सांस्कृतिक विरासत की धरोहर है. यह भाषा हमें जोड़ती है और भाषाई विविधता में एकता का प्रमाण देती है. डीइओ ने कहा कि शिक्षा विभाग लगातार स्कूलों और कॉलेजों में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष अभियान चला रहा है. वहीं, कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाषा वैज्ञानिक, हिंदी साहित्यकार व महिला कॉलेज के प्राचार्य डॉ राजेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सभ्यता का सार है. हिंदी के शब्द हमारी परंपराओं और इतिहास को जीवंत बनाये रखते हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पर्व जितिया जैसे शब्द हमारे समाज की प्राचीन मान्यताओं और जीवन स्थितियों की कहानी कहते हैं. विज्ञान और चिकित्सा के विकास के साथ सामाजिक सोच बदली है और आज समाज हम दो, हमारे दो की अवधारणा की ओर अग्रसर है. जिला कार्यक्रम पदाधिकारी रोहित रौशन ने कहा कि हिंदी हमारी आत्मा और सामाजिक पहचान है. कवि सम्मेलन का आयोजन इसके बाद कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसमें डीइओ ने अपनी कविता ह से हिंदी, ह से हिंदुस्तान हमारा है. स से सुंदर, स से सबसे प्यारा देश हमारा है सुना कर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया. सामाजिक सुरक्षा के सहायक निदेशक निक्खू राम ने गंभीर कविता प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी. उत्तर प्रदेश के विख्यात शायर अहमद आजमी, पूनम श्रीवास्तव और फजीहत गहमरी ने शायरी से समां बांधा. जिले के कवि-शायर सरोज कुमार पंकज, अख्तर इमाम अंजुम, तनवीर अख्तर, ललन सिंह ललित, डॉ विनोद मिश्र और वीरेंद्र तिवारी ने भी अपनी कविताओं से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. कार्यक्रम की अध्यक्षता एसपी जैन कॉलेज के पूर्व प्राचार्य व विश्व भोजपुरी सम्मेलन के उपाध्यक्ष डॉ गुरुचरण सिंह ने की, जबकि संचालन भारत स्तर के विख्यात शायर मतीन सासारामी ने किया. समाजसेवी रामपुकार पांडेय उर्फ मान बाबा की उपस्थिति विशेष रही. कार्यक्रम को सफल बनाने में शिक्षा विभाग के पंकज कुमार, सुधीर कुमार चौबे, राजेश कुमार रावत, बीआरपी सहित अनेक कर्मियों का योगदान सराहनीय रहा. समारोह में बड़ी संख्या में साहित्यकारों, शिक्षाविदों, छात्रों और आमजन की उपस्थिति रही. कार्यक्रम में प्रशासनिक पदाधिकारियों की रही कमी शिक्षा विभाग के तत्वावधान में हिंदी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में जहां आम जनों से ज्यादा शिक्षा विभाग के कर्मियों की संख्या श्रोता के रूप में रहीं. वहीं, इस कार्यक्रम में प्रशासनिक पदाधिकारी में सामाजिक सुरक्षा के सहायक निदेशक के अलावा अन्य प्रशासनिक पदाधिकारी नजर नहीं आये, जो लोगों में चर्चा का विषय बन गया.

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Published by: Prabhanjay kumar

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