प्रतिनिधि, बिक्रमगंज बिक्रमगंज थाना क्षेत्र के बरूना गांव में अखिलेश राय हत्याकांड के बाद पुलिस की लगातार दबिश और सख्त रुख के कारण घटना के बाद से फरार चल रहे मुख्य नामजद आरोपितों में शामिल चार लोगों ने शनिवार को न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया. इसे पुलिस की सक्रिय कार्रवाई और बढ़ते दबाव का परिणाम माना जा रहा है. हत्या की घटना के तुरंत बाद एसडीपीओ बिक्रमगंज के नेतृत्व में विशेष टीम गठित कर गांव और आसपास के इलाकों में लगातार छापेमारी की जा रही थी. पुलिस ने इससे पहले ही दो नामजद आरोपित संगीता कुंवर और त्रिभुवन राय को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. पुलिस ने बताया था कि दोनों आरोपितों के पास से घटना में प्रयुक्त .315 बोर का देसी कट्टा भी बरामद किया था. गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने अन्य आरोपियों के संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी, जिससे फरार आरोपितों में हड़कंप मच गया. इसी दबाव के बीच हत्याकांड के चार मुख्य नामजद आरोपित अंकित राय, नीरज राय, भोले शंकर राय और रजनीश राय ने बिक्रमगंज व्यवहार न्यायालय में एसडीजेएम के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया.एएसपी संकेत कुमार ने बताया कि पुलिस की लगातार छापेमारी, मोबाइल सर्विलांस और संभावित गिरफ्तारी के डर से आरोपियों ने कोर्ट का रास्ता चुना. उन्होंने बताया कि अब तक की जांच में यह बात सामने आयी है कि बरूना गांव में दो परिवारों के बीच दशकों पुरानी रंजिश चली आ रही है. वर्ष 1974 से शुरू हुआ यह विवाद समय-समय पर हिंसक घटनाओं में तब्दील होता रहा है. पुलिस का मानना है कि यह हत्या 2018 के जोत राय हत्याकांड और पुराने आपसी संघर्ष की ही कड़ी है. घटना वाले दिन भी एक परिवार में दशकर्म कार्यक्रम चल रहा था, इसी दौरान प्रतिशोध की भावना फिर भड़क उठी. थानाध्यक्ष ललन कुमार ने बताया कि पुलिस शेष फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास कर रही है और मामले से जुड़े हर पहलू की गहन जांच की जा रही है.
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