फोटो -6-पहचान एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी के स्थापना दिवस कार्यक्रम में मंचासीन अतिथि. प्रतिनिधि, बिक्रमगंज शिक्षा को सामाजिक बदलाव का सबसे सशक्त माध्यम बताते हुए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मंत्री मोहम्मद जमा खान ने कहा कि शिक्षा ही वह ताकत है, जिससे गरीबी, अशिक्षा और पिछड़ेपन की जंजीरों को तोड़ा जा सकता है. वे बुधवार को मदरसा अरबिया रफाहुल उलूम, बिक्रमगंज परिसर में आयोजित पहचान एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी के पांचवें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे. मंत्री ने पहचान एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी की ओर से गरीब और असहाय बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने के प्रयासों की सराहना की़ उन्होंने कहा यह संस्था वास्तव में “सबका साथ, सबका विकास” की भावना को धरातल पर उतार रही है. उन्होंने बताया कि मौलाना अबुल कलाम आजाद लाइब्रेरी से पढ़ाई कर अब तक 22 बच्चों ने विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी हासिल की है, जो पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है. उन्होंने सफल विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए सोसाइटी द्वारा दिये गये उपहारों की भी प्रशंसा की और इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बताया. कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि काराकाट के सांसद राजा राम सिंह ने कहा कि शिक्षा ही समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है. पहचान जैसी संस्थाएं उन बच्चों के सपनों को पंख दे रही हैं, जो संसाधनों के अभाव में पीछे रह जाते हैं. उन्होंने सोसाइटी के कार्यों की प्रशंसा करते हुए हर संभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया. काराकाट विधायक अरुण सिंह ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि पहचान एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी के स्थायी विस्तार और शैक्षणिक गतिविधियों को और मजबूत करने के लिए संस्था को जमीन का बंदोबस्त कराया जायेगा, ताकि भविष्य में एक बेहतर शैक्षणिक परिसर का निर्माण हो सके. उन्होंने संस्था को सहयोग राशि देने की भी बात कही. कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि सोसाइटी की ओर से आर्थिक रूप से कमजोर लड़के-लड़कियों को नि:शुल्क शिक्षा के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अनुकूल वातावरण और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाता है. मौलाना अबुल कलाम आजाद लाइब्रेरी आज क्षेत्र के गरीब छात्रों के लिए आशा की किरण बन चुकी है. स्थापना दिवस समारोह में सोसाइटी के अध्यक्ष जैनुद्दीन अंसारी, सचिव महफूज़ आलम, पूर्व सभापति रब नवाज खान (राजू), समाजसेवी आलिम कुरैशी, अजमूल हक खान, हसनैन खान, मास्टर अनीस खान, हाजी सुल्तान, असगर हुसैन ने भी संबोधित किया.
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