कड़ाके की ठंड और घने कोहरे से आलू-सरसों की फसल पर संकट, किसान चिंतित

SASARAM NEWS.प्रखंड क्षेत्र में पिछले कई दिनों से पड़ रही कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है. इसका सबसे गहरा असर आलू की फसल पर पड़ रहा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गयी है.

फोटो -2- खेत में लगा आलू .प्रतिनिधि, नासरीगंज

प्रखंड क्षेत्र में पिछले कई दिनों से पड़ रही कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है. इसका सबसे गहरा असर आलू की फसल पर पड़ रहा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गयी है. बढ़ती ठंड और कोहरा गेहूं की फसल के लिए फायदेमंद माना जा रहा है, जबकि आलू और सरसों के लिए यह नुकसानदायक साबित हो रहा है. किसान आलू और सरसों की फसल बचाने के लिए जद्दोजहद में जुट गये हैं. किसानों का कहना है कि यदि लंबे समय तक कोहरे और पाले का प्रकोप रहा, तो इन दोनों फसलों को भारी नुकसान हो सकता है. वहीं कृषि विशेषज्ञ भी किसानों को संभावित नुकसान को लेकर सजग कर रहे हैं. इस रबी सीजन में प्रखंड क्षेत्र में गेहूं, सरसों सहित विभिन्न रबी फसलों के अलावा आलू की भी बुआई की गयी है. दरअसल सोन नदी के किनारे आलू की खेती बड़े पैमाने पर होती है. बीते एक सप्ताह से अधिक समय से सर्दी का असर तेज है. ऐसे में फूलदार फसलों जैसे सरसों, मटर और अरहर में माहू कीट का खतरा बढ़ गया है, वहीं आलू की फसल में झुलसा रोग लगने की आशंका भी बनी हुई है.

आलू की फसल पाला और झुलसा रोग की चपेट में आने का डर

किसान देवेंद्र सिंह, धर्मेंद्र सिंह, रामकुमार सोनी, पमु सिंह, मदन सिंह और पवन सिंह सहित अन्य किसानों ने बताया कि लगातार पड़ रही कड़ाके की ठंड से आलू की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान होने का डर सता रहा है. यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो आलू की फसल पाला और झुलसा रोग की चपेट में आ सकती है. किसानों के अनुसार घना कोहरा और लगातार नमी आलू की फसल के लिए बेहद हानिकारक है. पाला पड़ने से पत्तियां गल जाती हैं और झुलसा रोग तेजी से फैलता है.

क्या कहते हैं किसान सलाहकार

किसान सलाहकार अनिल सिंह ने बताया कि कोहरे से आलू की अगेती फसल में झुलसा रोग आ सकता है, जबकि सरसों की अगेती फसल का दाना ठंड और कोहरे के कारण छोटा रह सकता है. आलू की फसल में 10 से 19 डिग्री सेल्सियस तापमान पर पछेती झुलसा रोग तेजी से फैलता है, जिससे पत्तियां सूख जाती हैं और पूरी फसल नष्ट होने की आशंका रहती है. उन्होंने बताया कि झुलसा रोग के लक्षण दिखने पर आलू की फसल में मैंकोजेब या मेटालैक्सिल का छिड़काव करें. वहीं सरसों के खेतों में 80 प्रतिशत घुलनशील सल्फर का छिड़काव पाले से बचाव में कारगर होगा. मटर, चना और अन्य सब्जी वाली फसलों पर भी पाले का प्रतिकूल असर पड़ रहा है, ऐसे में किसानों को सतर्कता बरतने की सलाह दी गयी है.

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Published by: Anurag sharan

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