नौंवा महाविद्यालय में यौन उत्पीड़न रोकथाम पर संगोष्ठी

यौन उत्पीड़न मानवीय हिंसा का गंभीर रूप, जागरूकता से ही सुरक्षित कार्यस्थल संभव

कोचस.

राजमुनी देवी चन्द्रधर राय महाविद्यालय, नौंवा के सभाकक्ष में गुरुवार को एनएसएस के तत्वावधान में यौन उत्पीड़न रोकथाम सप्ताह के तहत यौन उत्पीड़न कारण और निवारण विषय पर विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया. इस अवसर पर एनएसएस की कार्यक्रम पदाधिकारी प्रो रम्भा कुमारी ने कहा कि यौन उत्पीड़न किसी व्यक्ति के खिलाफ किया गया अवांछित और अनुचित यौन व्यवहार है, जिससे पीड़ित असहज, भयभीत और अपमानित महसूस करता है. इसके अंतर्गत मौखिक टिप्पणियां, भद्दे मजाक, अनुचित स्पर्श या जबरन यौन कृत्यों की मांग शामिल है. यह कार्यस्थल, सार्वजनिक स्थानों या ऑनलाइन माध्यमों पर कहीं भी हो सकता है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 में भारत सरकार ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम लागू किया, जिसका उद्देश्य कार्यस्थल पर महिलाओं की लैंगिक गरिमा और सम्मान सुनिश्चित करना है. वहीं प्रो भानु प्रताप सिंह ने कहा कि यौन उत्पीड़न शारीरिक और मानसिक शोषण के साथ-साथ मानवीय हिंसा का भी गंभीर रूप है. इसकी रोकथाम के लिए एनएसएस स्वयंसेवकों को व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाना चाहिए. कार्यक्रम को प्रभारी प्राचार्य प्रो रामनाथ सिंह, प्रो विनय कुमार सिंह, डॉ रामाशंकर सिंह, प्रो जयशंकर प्रसाद सिंह और रामेश्वर सिंह ने भी संबोधित किया. मौके पर आर्यावर्त कुमार, सचिन कुमार, रामध्यान पाल, सिंपल कुमारी, नितू कुमारी, प्रियंका कुमारी, योगेन्द्र कुमार, उर्मिला कुमारी, सुनिता कुमारी सहित दर्जनों स्वयंसेवी छात्र-छात्राएं उपस्थित थे.

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Published by: Anurag sharan

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