प्रधानाध्यापक पर 25 हजार रुपये का जुर्माना, सूचना छिपाने का आरोप

Sasaram news. बिहार राज्य सूचना आयोग ने सूचना के अधिकार अधिनियम (आरटीआइ) के उल्लंघन पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रखंड के हरवंश नारायण 10 2 उच्च विद्यालय, बेलवाई के प्रभारी प्रधानाध्यापक-सह-लोक सूचना पदाधिकारी पर 25,000 रुपये का अर्थदंड लगाया है.

आरटीआइ के उल्लंघन मामले में बड़ी कार्रवाई प्रतिनिधि, काराकाट बिहार राज्य सूचना आयोग ने सूचना के अधिकार अधिनियम (आरटीआइ) के उल्लंघन पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रखंड के हरवंश नारायण 10 2 उच्च विद्यालय, बेलवाई के प्रभारी प्रधानाध्यापक-सह-लोक सूचना पदाधिकारी पर 25,000 रुपये का अर्थदंड लगाया है. यह दंड सूचना उपलब्ध कराने में अत्यधिक विलंब और अधिनियम की स्पष्ट अवहेलना के मद्देनजर लगाया गया है. यह मामला वाद संख्या ए-7266/22 से जुड़ा है, जिसमें दिनारा प्रखंड क्षेत्र के बेलवैयां गांव निवासी अपीलार्थी विद्यासागर सिंह ने वर्ष 2019-20 और 2020-21 के दौरान विद्यालय के छात्र कोष, विकास कोष, कैश बुक, बैंक पासबुक, सरकारी सहायता की विवरणी एवं विद्यालय की निजी भूमि से संबंधित जानकारी प्रपत्र ‘क’ के माध्यम से 30 अगस्त 2021 को मांगी थी. निर्धारित समय सीमा में सूचना न मिलने के कारण अपीलार्थी ने पहले 28 सितंबर 2021 को प्रथम अपील, फिर दूसरी अपील 17 दिसंबर 2021 को राज्य सूचना आयोग में दर्ज करायी. प्रभारी प्रधानाध्यापक की ओर से तर्क दिया गया कि मांगी गयीं सूचनाएं ‘विद्यालय गोपनीय अभिलेख’ के अंतर्गत आती हैं, जिन्हें केवल सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से ही सार्वजनिक किया जा सकता है. किंतु आयोग ने इस तर्क को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि आरटीआइ अधिनियम की धारा 8 और 9 के अंतर्गत केवल विशेष परिस्थितियों में ही सूचना से छूट दी जा सकती है और यह मामला उन श्रेणियों में नहीं आता. आयोग ने यह भी दोहराया कि अधिनियम की धारा 2(ज) के अनुसार, वित्तीय और प्रशासनिक सूचनाएं सार्वजनिक सूचना के दायरे में आती हैं, जिनके लिए वरीय पदाधिकारी की अनुमति आवश्यक नहीं है. आयोग ने टिप्पणी की है कि प्रधानाध्यापक अधिनियम के प्रावधानों से पूर्णतः अवगत नहीं हैं और उन्होंने अधिकार क्षेत्र का दुरुपयोग करते हुए बार-बार सूचना देने से इन्कार किया. यह भी बताया गया कि सूचनाएं डाक से भेजे जाने का दावा किया गया, परंतु अपीलार्थी को प्राप्त नहीं हुईं. तीन वर्ष छह माह बीत जाने के बावजूद अब तक सूचना नहीं दिये जाने को आयोग ने अत्यंत गंभीरता से लिया. सूचना देने में विफलता और इससे अपीलार्थी को हुई मानसिक पीड़ा को ध्यान में रखते हुए आयोग ने अधिनियम की धारा 20(1) के तहत 25,000 रुपये का जुर्माना अधिरोपित किया है. साथ ही, जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं जिला कोषागार पदाधिकारी, रोहतास को निर्देशित किया गया है कि जुर्माने की राशि प्रधानाध्यापक के अगले वेतन भुगतान से पूर्व संबंधित मद में जमा कराना सुनिश्चित करें. इसके अतिरिक्त लोक सूचना पदाधिकारी को निर्देश दिया गया है कि वे अपीलार्थी को संपूर्ण सूचना प्रदान कर आगामी सुनवाई सात मई 2025 को पूर्वाह्न 11 बजे आयोग में स्वयं उपस्थित हों. यह मामला न केवल सूचना के अधिकार की अहमियत को रेखांकित करता है, बल्कि उन अधिकारियों के लिए भी एक स्पष्ट चेतावनी है, जो पारदर्शिता से मुंह मोड़ते हुए कानून की अनदेखी करते हैं. आयोग की यह सख्त कार्रवाई प्रशासनिक जवाबदेही और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक सशक्त कदम के रूप में देखा जा रहा है. इस संबंध में स्कूल के प्रभारी प्रधानाध्यापक मनोज कुमार ने कहा कि सूचना देने में देर हुई है. सात मई 2025 को बुलाया गया है. आयोग में उपस्थिति दर्ज कराऊंगा. जो भी आदेश होगा, उसे पूरा किया जायेगा.

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By Anurag sharan

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