जगदंबा घर में दीयरा बार अइनी हे...

जगदंबा घर में दीयरा बार अईनी हे... गीत जैसे ही सोनपुर हरिहर क्षेत्र के पर्यटन विभाग के पंडाल में गुंजा पंडाल में मौजूद लोगों ने तालिया की गड़गड़ाहट से अभिनंदन करना शुरू कर दिया.

छपरा. जगदंबा घर में दीयरा बार अईनी हे… गीत जैसे ही सोनपुर हरिहर क्षेत्र के पर्यटन विभाग के पंडाल में गुंजा पंडाल में मौजूद लोगों ने तालिया की गड़गड़ाहट से अभिनंदन करना शुरू कर दिया. यह आवाज थी चर्चित गायिका वंदना सिंहा की, जो पद्मश्री और पद भूषण से सम्मानित शारदा सिन्हा की पुत्री हैं. वंदना ने काले के शिव के मनाइन हो, छोड़े बैठा है सारा जगाना मुझे, आजू धनवाँ कुटाऊ चारू वरवा से, आगे माई हरदी हरदिया दुर पातर ना , पिरि निया काहे ना लगोले ,अमुआ मनुअता के , पटना से बड्दा – अपना बलमां के ,बाना दिहले टीकता, चिहूँ चिहूँ चिहूं चिरइय, कुछवो ना बोलब चाहे,कहे तोसे सजना समेत छठ महापर्व के भी कई गाने प्रस्तुत किया. लोगों ने काफी तन्मयता से सभी प्रस्तुतियों को सुना और तालियां बजाई. इसके बाद कजरी, झूमर और सामा-चकेवा पर आधारित एक से बढ़कर एक लोक-नृत्य प्रस्तुत किए गए. कार्यक्रम का निर्देशन अदिति सिंह ने किया. मंच पर सोनाली सरकार, निशा कुमारी, रागिनी कुमारी, कृतिका गुप्ता, नंदिनी कुमारी, संध्या कुमारी और अनीशा कुमारी सहित कई कलाकारों ने दमदार प्रदर्शन किया. मंच संचालन चर्चित उद्घोषक संजय भारद्वाज ने किया. इसी क्रम में कुमार उदय सिंह के नेतृत्व में सुदामा पांडे और मुन्ना कुमार ने पारंपरिक लौंडा नाच की प्रस्तुति कर दर्शकों से खूब सराहना प्राप्त की. लेकिन संध्या का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब शारदा सिन्हा की पुत्री वंदना सिन्हा मुख्य मंच पर पहुंचीं। उन्होंने बताया कि वर्ष 1987 में बचपन में वे अपनी मां के साथ सोनपुर मेला के इसी मंच पर कार्यक्रम देखने आई थीं.जैसे ही मंच पर “जगदम्बा घर में दियारा बार आईली हे…” गीत की धुन बजी, पुरानी यादें ताजा हो उठीं और वे भावुक हो गईं.

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By ALOK KUMAR

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