सारण: जमीन के बदले मुआवजे का इंतजार, 60 भू-स्वामियों के अल्टीमेटम से गंडक पुल का काम बंद

Chanchalia Gandak Bridge Compensation: तरैया प्रखंड में चंचलिया गंडक पुल का निर्माण भूमि मुआवजे के विवाद में फंस गया है. 60 किसान 15.5 एकड़ जमीन के लिए मुआवजे की मांग कर रहे हैं, जिसके कारण चार दिनों से निर्माण कार्य रुका हुआ है. स्थानीय नेता हस्तक्षेप कर रहे हैं.

Chanchalia Gandak Bridge Compensation: तरैया प्रखंड के चंचलिया पंचायत स्थित चंचलिया दियारा में गंडक नदी पर बन रहे पुल का निर्माण भूमि मुआवजे के विवाद में फंसता नजर आ रहा है. पुल और एप्रोच सड़क के लिए करीब 60 किसानों व भूमिधारकों की लगभग 15.5 एकड़ जमीन अधिग्रहित की जा रही है, लेकिन अब तक मुआवजे का भुगतान नहीं होने से भूमिधारकों में नाराजगी बढ़ गयी है. आक्रोशित भूमिधारकों ने पिछले चार दिनों से निर्माण कार्य रोक रखा है.

इसी मुद्दे को लेकर शनिवार को चंचलिया पंचायत भवन में भूमिधारकों की बैठक हुई. बैठक में राजद के वरिष्ठ नेता सह तरैया विधानसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी शैलेन्द्र प्रताप सिंह भी पहुंचे. उन्होंने आक्रोशित किसानों और भूमिधारकों से बातचीत कर उन्हें शांत कराया तथा पूरे मामले की जानकारी ली.

दो महीने से चल रहा पुल निर्माण, मुआवजे का इंतजार

भूमिधारकों के अनुसार चंचलिया दियारे में गंडक नदी पर पुल निर्माण का कार्य करीब दो महीने पहले शुरू हुआ था. निर्माण के लिए किसानों की जमीन ली जा रही है, लेकिन भूमि अधिग्रहण के बदले मिलने वाले मुआवजे की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई है.

भूमिधारकों का कहना है कि निर्माण कार्य लगातार आगे बढ़ रहा है, लेकिन जमीन के बदले भुगतान को लेकर उन्हें सिर्फ आश्वासन मिल रहा है. इसी कारण किसानों में आक्रोश बढ़ता गया और उन्होंने निर्माण कार्य रोकने का निर्णय लिया.

8 जून की बैठक में भी जल्द प्रक्रिया पूरी करने का दिया गया था भरोसा

राजद नेता शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि इससे पहले 8 जून को छपरा सांसद राजीव प्रताप रूडी, महाराजगंज सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल, पुल निर्माण कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर और चंचलिया के किसानों व भूमिधारकों के साथ बैठक हुई थी.

उस बैठक में भूमिधारकों को आवश्यक कागजात जमा करने और मुआवजे से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ाने को कहा गया था. लेकिन करीब दो महीने बीतने के बाद भी मुआवजे को लेकर ठोस कार्रवाई नहीं होने से किसानों में नाराजगी है.

टोपोलैंड को लेकर भी उठ रहा सवाल

भूमिधारकों का कहना है कि चंचलिया दियारे की जमीन को टोपोलैंड के नाम पर जटिल बनाया जा रहा है. किसानों का सवाल है कि जब जमीन की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री होती रही है तथा समय-समय पर लगान जमा कर उसकी रसीद भी कटती रही है, तो अब जमीन के स्वरूप को लेकर मुआवजे में परेशानी क्यों हो रही है.

भूमिधारकों ने प्रशासन से जमीन के कागजात की स्थिति स्पष्ट करने और वैधानिक प्रक्रिया पूरी कर उचित मुआवजा देने की मांग की है.

राजद नेता ने सीओ से फोन पर ली जानकारी

बैठक के दौरान शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने तरैया सीओ अजय कुमार से मोबाइल पर बातचीत कर भूमि अधिग्रहण और मुआवजे की प्रक्रिया की जानकारी ली. सीओ ने उन्हें बताया कि संबंधित जमीन से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं को पूरा कर करीब 10 दिनों के अंदर वरीय पदाधिकारी को रिपोर्ट भेजी जायेगी.

इसके बाद भूमिधारकों को उम्मीद है कि मुआवजे की प्रक्रिया में तेजी आयेगी और उनकी समस्या का समाधान होगा.

मुआवजा नहीं मिला तो कोर्ट जाने की चेतावनी

शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि किसानों और भूमिधारकों को उनकी जमीन का उचित मुआवजा मिलना चाहिए. यदि प्रशासनिक स्तर पर निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी मुआवजे का समाधान नहीं होता है, तो किसान और भूमिधारक कागजी प्रक्रिया पूरी कर न्यायालय की शरण लेने को मजबूर होंगे.

उन्होंने कहा कि करीब 60 किसानों के लिए उनकी जमीन ही आय का प्रमुख साधन है. जमीन जाने के बाद उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिला तो उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है.

खेती से चलता है परिवार का खर्च

भूमिधारकों ने बताया कि उनकी आजीविका मुख्य रूप से खेती पर निर्भर है. किसान अपने खेतों में धान, गेहूं, ईंख, दलहन और तिलहन जैसी फसलों का उत्पादन करते हैं. फसल बेचकर ही परिवार का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और शादी-विवाह समेत अन्य जरूरतें पूरी की जाती हैं.

ऐसे में जमीन के अधिग्रहण के बाद मुआवजा नहीं मिलने से किसानों की चिंता बढ़ गयी है.

निर्माण कार्य रुकने से बढ़ी प्रशासन की चुनौती

पुल निर्माण क्षेत्र में चार दिनों से काम रुकने के कारण परियोजना की समय-सीमा पर भी असर पड़ सकता है. एक ओर क्षेत्र में गंडक नदी पर पुल बनने से आवागमन की सुविधा बढ़ने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर जमीन मुआवजे का विवाद निर्माण कार्य के लिए चुनौती बन गया है.

अब प्रशासन के सामने भूमिधारकों की आपत्ति का समाधान करने, जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच पूरी करने और मुआवजे की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है.

बैठक में बड़ी संख्या में किसान रहे मौजूद

बैठक में राजद नेता शैलेन्द्र प्रताप सिंह, अमरनाथ सिंह, मुखिया नंदकिशोर साह, दिलीप राम, अरविन्द सिंह, सोनू सिंह, संजय यादव, संजीव सिंह, धर्मेंद्र राय, पंचू राय, बिनोद नारायण सिंह, प्रेम प्रताप सिंह, कौशल किशोर सिंह, भोला राय, लक्ष्मण सिंह समेत बड़ी संख्या में किसान एवं भूमिधारक मौजूद रहे.

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By मनोज कुमार

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