Sarayu River Water Level Chhapra: लगातार हो रही बारिश और नेपाल से आ रहे पानी का असर अब सारण जिले में स्पष्ट रूप से दिखने लगा है. गंडक और गंगा की तुलना में सरयू नदी के जलस्तर में सबसे अधिक तेजी से वृद्धि दर्ज की जा रही है. पिछले 72 घंटे में सरयू के जलस्तर में करीब 1.14 मीटर की बढ़ोतरी हुई है. जलस्तर में अचानक हुई इस वृद्धि से प्रशासन की चिंता बढ़ गयी है.
बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारियों ने प्रभावित इलाकों का दौरा शुरू कर दिया है. वहीं, राहत और बचाव की तैयारियां भी तेज कर दी गयी हैं. जिले के रिविलगंज, मांझी, सदर, दिघवारा और सोनपुर प्रखंड के नदी तटीय इलाकों में बाढ़ का असर अधिक दिखाई दे रहा है.
बाल्मीकि नगर बैराज से फिर छोड़ा गया 1.47 लाख क्यूसेक पानी
लगातार बारिश और नेपाल से आ रहे पानी के कारण सारण में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. बुधवार को एक बार फिर बाल्मीकि नगर बैराज से करीब 1.47 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया. इसका असर जिले की नदियों के जलस्तर पर भी दिखाई दे रहा है.
पड़ोसी जिलों और राज्यों में लगातार हो रही बारिश के कारण विभिन्न नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है. नदी तटीय क्षेत्र के कई गांव पहले ही बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं. कई इलाकों में पानी घरों तक पहुंच गया है.
रिविलगंज की कई पंचायतों में फिर शुरू हुआ पलायन
रिविलगंज प्रखंड की कई पंचायतें दोबारा आयी बाढ़ से प्रभावित हो गयी हैं. इनमें छपरा शहर से सटे दिलियारहीमपुर पंचायत के कई गांव शामिल हैं. जान टोला और नेवाजी टोला समेत अन्य इलाकों के 100 से अधिक घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है. पानी बढ़ने के बाद प्रभावित परिवारों का पलायन शुरू हो गया है.
सिताब दियारा और आसपास की अन्य पंचायतें भी प्रभावित होने लगी हैं. सदर प्रखंड के कुतुबपुर दियारा, कोटवा पट्टी रामपुर और मम्हाजी सहित कई इलाकों में सरयू नदी का पानी प्रवेश कर गया है. कई गांवों के टापू में तब्दील होने की स्थिति बन गयी है.
बुधवार को नदियों के जलस्तर में तेजी से हुई वृद्धि
बुधवार को जिले के विभिन्न नदी घाटों पर जलस्तर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गयी. बाढ़ नियंत्रण विभाग के कार्यपालक अभियंता की ओर से 2 सितंबर की सुबह छह बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार, घाघरा नदी छपरा का खतरे का निशान 53.68 मीटर है, जबकि वर्तमान जलस्तर 52.33 मीटर दर्ज किया गया. मंगलवार की तुलना में बुधवार को यहां 49 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई.
सरयू/घाघरा नदी के सिसवन क्षेत्र में खतरे का निशान 57.04 मीटर है और वर्तमान जलस्तर 56.21 मीटर दर्ज किया गया. यहां 17 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई है.
गंडक नदी हाजीपुर में खतरे का निशान 50.32 मीटर है, जबकि वर्तमान जलस्तर 49.71 मीटर है. मंगलवार की तुलना में बुधवार को यहां 28 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गयी.
गंडक नदी रेवा में खतरे का निशान 54.41 मीटर है और वर्तमान जलस्तर 53.67 मीटर दर्ज किया गया. यहां पांच सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई है.
गंगा नदी गांधी घाट पर खतरे का निशान 48.60 मीटर है, जबकि बुधवार को जलस्तर 49.73 मीटर दर्ज किया गया. यानी नदी खतरे के निशान से 1.13 मीटर ऊपर बह रही है. यहां मंगलवार की तुलना में करीब 32 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गयी है.
सारण में नदियों का वर्तमान जलस्तर
2 सितंबर 2026 की स्थिति
| नदी | खतरे का निशान | वर्तमान जलस्तर | बढ़ोतरी |
| गंगा, गांधी घाट | 48.60 मीटर | 49.73 मीटर | 32 सेंटीमीटर |
| गंडक, हाजीपुर | 50.32 मीटर | 49.71 मीटर | 28 सेंटीमीटर |
| गंडक, रेवा | 54.41 मीटर | 53.67 मीटर | 5 सेंटीमीटर |
| सरयू/घाघरा, सिसवन | 57.04 मीटर | 56.21 मीटर | 17 सेंटीमीटर |
| घाघरा, छपरा | 53.68 मीटर | 52.33 मीटर | 49 सेंटीमीटर |
48 घंटे बाद जलस्तर में कमी की उम्मीद
बाढ़ प्रमंडल, सारण के कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार प्रभाकर ने कहा कि लगातार बारिश, नेपाल से आ रहे पानी और पड़ोसी राज्यों में नदियों के जलस्तर में वृद्धि का असर सारण की विभिन्न नदियों पर दिख रहा है. हालांकि, यह स्थिति ज्यादा दिनों तक रहने की संभावना नहीं है और 48 घंटे बाद जलस्तर में फिर कमी शुरू होने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि स्थिति मौसम पर निर्भर करेगी.
उन्होंने बताया कि प्रशासन ने पहले से ही आवश्यक तैयारियां कर रखी हैं. आम लोगों से नदी तटों के पास नहीं जाने की अपील की गयी है. नाविकों से भी फिलहाल नदियों में नाव नहीं ले जाने का आग्रह किया गया है.
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने का दिया निर्देश
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों का लगातार दौरा करने और स्थिति पर नजर रखने का निर्देश दिया है. प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव की तैयारियों को भी सक्रिय रखा गया है.
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