Saran Nursing Home Sealed: डिलीवरी के बाद महिला की मौत के मामले में एक नर्सिंग होम पर हुई कार्रवाई के बाद निजी चिकित्सा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गये हैं. स्वास्थ्य विभाग ने नर्सिंग होम को सील कर दिया है. वहीं, जांच के दौरान यहां से जुड़े डॉक्टरों की डिग्री को लेकर भी चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. जांच टीम के अनुसार दो डॉक्टरों की डिग्री फर्जी पायी गयी है. इनमें हड्डी रोग विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत डॉ. डीके ओझा की डिग्री भी फर्जी मिलने की बात सामने आयी है.
पिछले दो महीने में सारण जिले के अलग-अलग नर्सिंग होम में तीन महिलाओं की मौत की बात सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई और जांच पर अब सवालों के साथ-साथ लोगों की नजर भी बनी हुई है.
महिला की मौत के बाद नर्सिंग होम सील
शिवम नर्सिंग होम में डिलीवरी के बाद महिला की तबीयत बिगड़ गयी और बाद में उसकी मौत हो गयी. घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मामले की जांच शुरू की. जांच के बाद नर्सिंग होम को सील कर दिया गया.
महिला की मौत के मामले में इलाज के दौरान किसी तरह की चिकित्सकीय लापरवाही हुई या नहीं, यह जांच का विषय है. हालांकि, नर्सिंग होम की जांच के दौरान डॉक्टरों की डिग्री को लेकर सामने आये तथ्य ने मामले को और गंभीर बना दिया है.
जांच में दो डॉक्टरों की डिग्री फर्जी मिलने का दावा
नोडल पदाधिकारी सह चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. चंद्रशेखर सिंह के नेतृत्व में गठित टीम ने गुरुवार को क्लीनिक और अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच की. इसी जांच के दौरान शिवम क्लीनिक से जुड़े दो डॉक्टरों की डिग्री फर्जी पाये जाने की बात सामने आयी.
जांच टीम के अनुसार हड्डी रोग विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत डॉ. डीके ओझा की डिग्री भी फर्जी पायी गयी. इसके बाद निजी चिकित्सा संस्थानों में डॉक्टरों की योग्यता और दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर सवाल उठने लगे हैं.
दो महीने में तीन महिलाओं की मौत से बढ़ी चिंता
सारण में पिछले दो महीने के दौरान अलग-अलग नर्सिंग होम में तीन महिलाओं की मौत का मामला सामने आने से निजी स्वास्थ्य संस्थानों की निगरानी को लेकर चिंता बढ़ गयी है. खासकर प्रसव और आपात चिकित्सा से जुड़े मामलों में मरीजों की सुरक्षा और योग्य चिकित्सकों की उपलब्धता अहम सवाल बन गयी है.
शिवम नर्सिंग होम में हुई कार्रवाई के बाद अब यह भी चर्चा है कि जिले में संचालित अन्य निजी नर्सिंग होम और क्लीनिकों में डॉक्टरों की डिग्री, पंजीकरण और चिकित्सा सुविधाओं की जांच कितनी प्रभावी तरीके से हो रही है.
फर्जी डिग्री के मामले ने बढ़ाये कई सवाल
स्वास्थ्य विभाग की जांच में डॉक्टरों की डिग्री फर्जी मिलने की बात सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि बिना वैध योग्यता के कोई व्यक्ति मरीजों का इलाज कैसे कर रहा था. यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला होगा.
हालांकि, महिला की मौत का सीधा कारण फर्जी डिग्री वाले डॉक्टर के इलाज को ही माना जाए, इसके लिए मेडिकल जांच और आधिकारिक रिपोर्ट जरूरी होगी. मौत की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.
अब दूसरे नर्सिंग होम की जांच पर नजर
शिवम नर्सिंग होम पर हुई कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग की नजर जिले के अन्य निजी क्लीनिक और नर्सिंग होम पर भी है. डॉक्टरों की डिग्री, संस्थान का पंजीकरण, अल्ट्रासाउंड संचालन और मरीजों को उपलब्ध करायी जा रही चिकित्सा सुविधाओं की जांच महत्वपूर्ण होगी.
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई से यह संदेश गया है कि निजी चिकित्सा संस्थानों में नियमों की अनदेखी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है.
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