Saran News : गड़खा के पचपतरा वनदेवी माता मंदिर परिसर में चल रहे नौ दिवसीय विराट शतचंडी महायज्ञ के आठवें दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. महायज्ञ में प्रवचन करते हुए सनातनी चित्राली उपाध्याय ने कहा कि बिना सत्संग के विवेक होना संभव नहीं है और रामचरितमानस हमें जिंदगी जीने का सही तरीका सिखाती है.
शतचंडी महायज्ञ के आठवें दिन कथा, भगवान का नाम जीवन को धन्य करता है
गड़खा प्रखंड के पचपतरा वनदेवी माता मंदिर के परिसर में चल रहे नौ दिवसीय विराट शतचंडी महायज्ञ के आठवें दिन श्रद्धालु श्रोताओं के बीच प्रवचन का आयोजन किया गया. इस दौरान सारण की सनातनी चित्राली उपाध्याय ने कथा कहते हुए कहा कि विवेक की खोज ही सत्संग है और बिना श्रद्धा के परमात्मा का दर्शन असंभव है. भगवान का नाम मानव जीवन को धन्य कर देता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर हर घर में कथाएं होंगी, तो बच्चे संस्कारी बनेंगे.
मां-बाप और गुरु का सम्मान करने से ही बच्चों को मिलेंगे अच्छे संस्कार
कथावाचक ने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि इस संसार में माता-पिता और गुरु से बढ़कर कोई दूसरा नहीं है, इसलिए सभी को उनका सदैव सम्मान करना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि प्रभु श्रीराम अगर ज्ञान हैं, तो माता सीता शक्ति स्वरूपा हैं और भगवान द्वारा रचित माया ही प्रकृति है. महान पुण्य संचित होने के बाद ही मानव जीवन प्राप्त होता है. मानव जीवन मिलने पर मोक्ष की इच्छा जागना और महापुरुषों का सत्संग मिलना बेहद दुर्लभ है. जीवन में सच्ची शांति ढूंढने के लिए परमात्मा की शरणागति में जाना ही होगा.
संत श्रीधर दास जी महाराज के सानिध्य में परिक्रमा और भंडारे का आयोजन
चित्राली उपाध्याय ने प्रसिद्ध चौपाई ‘बिनु सत्संग विवेक न होई, राम कृपा बिनु सुलभ न सोई’ के जरिए समझाया कि बिना ईश्वर की कृपा और सत्संग के ज्ञान नहीं मिल सकता. इस सत्संग सम्मेलन को विराट शतचंडी महायज्ञ के यज्ञाचार्य संत श्रीधर दास जी महाराज के शिष्य संत मुरारी स्वामी, संत शत्रुघ्न दास जी महाराज और राजेश उपाध्याय ने भी संबोधित किया. महायज्ञ में प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित होकर पूजा-पाठ और यज्ञ मंडप की परिक्रमा कर रहे हैं. यज्ञ परिसर में लगातार भंडारा भी चल रहा है, जहां सभी श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं और पूरी रात रासलीला का आनंद लेकर भक्ति सागर में गोता लगा रहे हैं.
