छपरा से संजय भारद्वाज की रिपोर्ट
Saran News: सारण जिला परिषद की अध्यक्ष जयमित्रा देवी के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव एक बार फिर कोरम के अभाव में खारिज हो गया. शुक्रवार को आयोजित विशेष बैठक में आवश्यक संख्या में पार्षद नहीं पहुंच सके, जिसके कारण मतदान की प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो सकी. इसके साथ ही जयमित्रा देवी की अध्यक्षी बरकरार रही और अब उनके अगले पंचायत चुनाव तक पद पर बने रहने की संभावना मजबूत हो गई है.
अविश्वास प्रस्ताव पर फिर लगा ब्रेक
जिला परिषद बोर्ड की विशेष बैठक के लिए कुल 48 पार्षदों में से कम से कम दो-तिहाई यानी 32 पार्षदों की उपस्थिति जरूरी थी. लेकिन निर्धारित समय तक मात्र 8 पार्षद ही सभागार पहुंचे. कोरम पूरा नहीं होने के कारण अविश्वास प्रस्ताव स्वतः खारिज कर दिया गया.
डीएम और डीडीसी करते रहे इंतजार
बैठक के दौरान जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव और उप विकास आयुक्त सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी लक्ष्मण तिवारी मौजूद रहे. अधिकारी निर्धारित समय तक पार्षदों के आने का इंतजार करते रहे, लेकिन पर्याप्त संख्या नहीं जुट सकी. इसके बाद बैठक समाप्त घोषित कर दी गई.
कुर्सी बची तो समर्थकों ने किया जोरदार स्वागत
बैठक समाप्त होने के बाद जब अध्यक्ष जयमित्रा देवी अपने समर्थक पार्षदों के साथ सभागार से बाहर निकलीं तो उनके समर्थकों ने फूल-मालाओं से स्वागत किया. इस दौरान जमकर नारेबाजी हुई और समर्थकों ने इसे जयमित्रा देवी की बड़ी राजनीतिक जीत बताया.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बुलाई गई थी बैठक
सारण जिला परिषद से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग को दिशा-निर्देश जारी किए गए थे. इसी के तहत 45 दिनों के भीतर अविश्वास प्रस्ताव पर नई प्रक्रिया पूरी करनी थी. पहले 29 अप्रैल को बैठक प्रस्तावित थी, लेकिन प्रशासनिक मार्गदर्शन की प्रक्रिया के कारण इसे टाल दिया गया और बाद में 12 जून की तिथि तय की गई.
हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था मामला
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था जब 2024 में पटना हाईकोर्ट ने अविश्वास प्रस्ताव पर विशेष बैठक कराने का आदेश दिया था. बाद में मतदान में जयमित्रा देवी को 18 और स्नेहा सिंह को 29 वोट मिले थे. इसके बाद जयमित्रा देवी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां से उन्हें राहत मिली और चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए पुनः बहाल कर दिया गया.
बैठक में ये पार्षद रहे मौजूद
विशेष बैठक में अध्यक्ष जयमित्रा देवी के अलावा आशा गुप्ता, छविनाथ सिंह, उर्मिला देवी, विनोद यादव, अनिल सिंह, सुनील राय और जफर इकबाल उपस्थित रहे. सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद कड़ी रखी गई थी ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जिला परिषद के करीब 22 पार्षद जिले से बाहर थे. सूत्रों के अनुसार कई पार्षद सिलीगुड़ी में मौजूद थे. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे अविश्वास प्रस्ताव की रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं.
सिर्फ 6 महीने का कार्यकाल
कुछ पार्षदों का मानना है कि जिला परिषद का कार्यकाल अब लगभग छह महीने ही शेष है. ऐसे में अध्यक्ष पद की लड़ाई में भारी राजनीतिक और आर्थिक खर्च की आशंका के कारण कई पार्षदों ने खुलकर दांव खेलने से परहेज किया. यही वजह रही कि बड़ी संख्या में सदस्य बैठक से दूर रहे. बैठक के बाद अध्यक्ष जयमित्रा देवी ने कहा कि पार्षदों का विश्वास पहले भी उनके साथ था और आज भी कायम है. उन्होंने कहा कि वह शेष कार्यकाल में विकास कार्यों को गति देंगी और आगामी चुनाव में भी पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरेंगी.
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