Saran News: छपरा नगर निगम की वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित 415 करोड़ रुपये के बजट पर शनिवार को बवाल मच गया. बजट स्वीकृति के लिए बुलाई गई बैठक भारी हंगामे की भेंट चढ़ गई. पार्षदों के दो गुट आमने-सामने आ गए और करीब 45 मिनट तक सभागार में जोरदार बहस, आरोप-प्रत्यारोप और तीखी नोकझोंक होती रही. स्थिति इतनी बिगड़ गई कि एक नाराज पार्षद ने अपनी कुर्सी तक फेंक दी, जिसके बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया.
बजट पेश होते ही भड़का विवाद
बैठक दोपहर 2:20 बजे शुरू हुई. जैसे ही महापौर ने 415 करोड़ रुपये के बजट को सदन में पेश किया, विपक्षी पार्षदों ने जोरदार विरोध शुरू कर दिया. वार्ड पार्षद श्वेता पांडे, श्याम कुमार और रमाकांत सिंह उर्फ डब्ल्यू ने मांग की कि पहले वित्तीय वर्ष 2025-26 के खर्च का पूरा हिसाब और ऑडिट रिपोर्ट सदन में रखी जाए, उसके बाद ही नए बजट पर चर्चा हो.
खर्च का हिसाब नहीं, तो बजट भी नहीं
महापौर लक्ष्मी नारायण गुप्ता और नगर आयुक्त रंजीत कुमार ने पार्षदों को समझाने की कोशिश की और कहा कि ऑडिट रिपोर्ट तैयार कर जल्द प्रस्तुत की जाएगी. लेकिन 18 से अधिक पार्षद अपनी मांग पर अड़े रहे. इसके बाद सदन में टोकाटोकी शुरू हुई, जो देखते ही देखते तीखी बहस और एक-दूसरे को देख लेने की धमकियों तक पहुंच गई.
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निगम सभागार बना राजनीतिक अखाड़ा
हंगामा इतना बढ़ गया कि एक आक्रोशित पार्षद ने सभागार के भीतर अपनी कुर्सी फेंक दी. कुर्सी फेंके जाने की घटना के बाद माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया. कई बार बैठक को शांत कराने की कोशिश हुई, लेकिन दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात पर डटे रहे.
टेंडर फिक्सिंग से भ्रष्टाचार तक के लगे आरोप
बैठक के दौरान पार्षदों ने एक-दूसरे पर करोड़ों रुपये की योजनाओं में टेंडर फिक्सिंग और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए. विपक्षी पार्षदों का कहना था कि पिछले वित्तीय वर्ष के खर्च का ब्योरा छिपाकर वित्तीय अनियमितताओं को दबाने की कोशिश की जा रही है. वहीं दूसरे पक्ष ने आरोप लगाया कि कुछ लोग विकास कार्यों को जानबूझकर रोकना चाहते हैं.
घटिया सड़क और बुझी स्ट्रीट लाइट पर भी फूटा गुस्सा
सिर्फ बजट ही नहीं, बल्कि शहर की खराब सड़कों और जर्जर स्ट्रीट लाइट व्यवस्था का मुद्दा भी बैठक में जोर-शोर से उठा. कई पार्षदों ने निगम क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की खराब स्थिति पर नाराजगी जताई और जवाबदेही तय करने की मांग की. महापौर लक्ष्मी नारायण गुप्ता ने बैठक के बाद कहा कि कुछ पार्षद विकास विरोधी मानसिकता के हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोग हर बैठक में जानबूझकर बाधा उत्पन्न करते हैं और निगम क्षेत्र के विकास को प्रभावित करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और समय आने पर जवाब भी देगी.
चार लाख लोगों पर असर
उपमहापौर रागिनी कुमारी ने कहा कि बजट पारित नहीं होने से निगम क्षेत्र की करीब चार लाख आबादी प्रभावित होगी. उन्होंने कहा कि विकास कार्यों को राजनीति से ऊपर रखकर कम से कम बजट को स्वीकृति देनी चाहिए थी ताकि जरूरी योजनाओं का काम बाधित न हो. भारी हंगामे और गतिरोध के कारण बैठक को स्थगित कर दिया गया. नगर आयुक्त रंजीत कुमार ने कहा कि महापौर के निर्देशानुसार जल्द ही दोबारा बैठक बुलाई जाएगी. उन्होंने भरोसा दिलाया कि नगर निगम प्रशासन हर हाल में बजट को पास कराने का प्रयास करेगा ताकि विकास कार्यों की गति प्रभावित न हो.
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