सारण में 3 महीने में 24 मौतें, सड़क किनारे खड़े ट्रक बन रहे काल, आंकड़ें कर देंगे हैरान, आखिर कब जागेगा सिस्टम?

Saran News: सारण जिले में भी राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) और राज्य राजमार्ग (एसएच) पर सड़क किनारे खड़े भारी वाहन लगातार लोगों की जान ले रहे हैं. पिछले तीन महीनों में ट्रक, हाइवा और अन्य भारी वाहनों से टकराकर 24 लोगों की मौत हो चुकी है.

सारण से प्रभात किरण हिमांशु की रिपोर्ट
Saran News:
बेगूसराय में सड़क किनारे खड़े ट्रक से कार टकराने और चार लोगों की मौत के बाद एक बार फिर सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. बेगूसराय में सड़क हादसे में 3 दारोगा सहित चार लोगों ने अपनी जान गंवा दी. इसके बावजूद अब भी सड़क किनारे ट्रकों का जाल देखने को मिल रहा है. सारण जिले में भी राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) और राज्य राजमार्ग (एसएच) पर सड़क किनारे खड़े भारी वाहन लगातार लोगों की जान ले रहे हैं. पिछले तीन महीनों में ट्रक, हाइवा और अन्य भारी वाहनों से टकराकर 24 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन हालात अब भी जस के तस बने हुए हैं. सड़कें मौत का कॉरिडोर बनती जा रही हैं और जिम्मेदार विभागों की कार्रवाई नाकाफी साबित हो रही है.

सड़क पर खड़े ट्रक बन रहे काल

सारण जिले के विभिन्न एनएच और एसएच पर सुबह से लेकर देर रात तक भारी वाहनों की लंबी कतार लगी रहती है. सड़क के किनारे खड़े ट्रक, हाइवा और ट्रैक्टर आम राहगीरों के लिए मौत का जाल साबित हो रहे हैं. खासकर रात के समय इन वाहनों में रिफ्लेक्टर और पर्याप्त संकेतक नहीं होने से हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.

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तीन महीने में 24 मौतें, फिर भी नहीं हुए पुख्ता इंतजाम

सड़क किनारे खड़े वाहनों से टकराकर पिछले तीन महीनों में बाइक सवारों, कार यात्रियों और अन्य वाहन चालकों सहित 24 लोगों की जान जा चुकी है. इसके बावजूद प्रशासन न तो सुरक्षित पार्किंग की व्यवस्था कर पाया है और न ही सड़क किनारे अवैध रूप से खड़े होने वाले भारी वाहनों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर सका है.

डोरीगंज और छपरा-आरा पुल पर हर दिन लगता है ट्रकों का अंबार

एनएच-19 पर डोरीगंज और छपरा-आरा पुल के आसपास सुबह से लेकर देर रात तक ट्रकों और हाइवा की लंबी कतारें लगी रहती हैं. कई बार पुल के दोनों ओर तीन-तीन किलोमीटर तक वाहन खड़े दिखाई देते हैं. ऐसे में छोटे वाहनों के लिए रास्ता संकरा हो जाता है और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है.

मेथवलिया फोरलेन बना ‘डेंजर जोन’, दो महीने में 20 से ज्यादा मौतें

छपरा शहर से सटे मेथवलिया फोरलेन की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक बताई जा रही है. पिछले दो महीनों में यहां 20 से अधिक लोगों की जान सड़क दुर्घटनाओं में जा चुकी है. सड़क किनारे खड़े बालू लदे ट्रक और हाइवा, धूल से कम हुई विजिबिलिटी और अपर्याप्त रोशनी इस मार्ग को बेहद खतरनाक बना रहे हैं.

महमदा फोरलेन से लेकर मशरक रोड तक मंडरा रहा मौत का साया

महमदा-गढ़खा एनएच, छपरा-मशरक रोड, उमधा फोरलेन, बनियापुर रोड और छपरा-खैरा रोड जैसे कई मार्गों पर दिन-रात भारी वाहन खड़े मिल जाते हैं. दोनों ओर ट्रक खड़े होने से चौड़ी सड़क भी संकरी हो जाती है, जिससे जाम और दुर्घटनाएं आम बात बन गई हैं.

नो एंट्री का इंतजार बना परेशानी की जड़

बालू और अन्य सामग्री ढोने वाले ट्रकों को नो एंट्री खत्म होने का इंतजार करना पड़ता है. इस दौरान सैकड़ों वाहन सड़क किनारे घंटों खड़े रहते हैं. कई चालक पास के ढाबों और गैराजों के सामने ही वाहन खड़ा कर आराम करते हैं, जिससे सड़क की चौड़ाई और कम हो जाती है.

रिफ्लेक्टर की कमी बन रही हादसों की बड़ी वजह

जांच में सामने आया है कि अधिकांश ट्रकों और हाइवा में रिफ्लेक्टिव टेप या तो खराब हैं या धूल से ढके हुए हैं. कई वाहन चालक पार्किंग लाइट और हैजार्ड लाइट भी चालू नहीं रखते. परिणामस्वरूप तेज रफ्तार से आने वाले वाहन चालकों को आखिरी समय तक पता नहीं चल पाता कि आगे भारी वाहन खड़ा है.

एक के बाद एक हादसे, लेकिन सबक नहीं

बारात से लौट रही बोलेरो ट्रक से टकराई

13 मई को रसूलपुर थाना क्षेत्र में बारात से लौट रही बोलेरो सड़क किनारे खड़े ट्रक से टकरा गई थी, जिसमें एक युवक की मौत और सात लोग घायल हो गए थे.

मेथवलिया में तीन ट्रकों की टक्कर

कुछ महीने पहले मेथवलिया फोरलेन पर पहले से खड़े दो ट्रकों में तेज रफ्तार बालू लदा ट्रक घुस गया था. हादसे में चालक की मौके पर मौत हो गई थी.

मकेर में बस से टकराया ऑटो

10 अप्रैल को मकेर में सड़क किनारे खड़ी बस से ऑटो टकरा गया था, जिसमें चार शिक्षक और चालक घायल हो गए थे.

प्रशासन का दावा-लगातार चल रही कार्रवाई

जिला परिवहन पदाधिकारी लतीफुर रहमान के अनुसार सड़क किनारे लंबे समय तक खड़े रहने वाले भारी वाहनों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है. पिछले एक महीने में 20 से अधिक वाहनों का चालान काटा गया है. साथ ही कई ब्लैक स्पॉट चिन्हित कर वहां बैरिकेडिंग और साइन बोर्ड भी लगाए गए हैं.

आखिर क्यों नहीं रुक रहे हादसे?

  • एनएच और एसएच पर भारी वाहनों की लंबी कतार
  • अधिकांश ट्रकों में रिफ्लेक्टर का अभाव
  • सड़क किनारे संचालित अवैध ढाबे
  • हाईवे किनारे वाहन मरम्मत की दुकानें
  • पुलिस पेट्रोलिंग की कमी
  • पर्याप्त स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था नहीं
  • सड़क पर फैली बालू और धूल
  • तेज रफ्तार और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी

इन हाईवे पर सबसे ज्यादा खतरा

  • छपरा-डोरीगंज रोड
  • छपरा-आरा रोड
  • मेथवलिया फोरलेन
  • महमदा-गढ़खा एनएच
  • छपरा-मशरक रोड
  • उमधा फोरलेन
  • बनियापुर रोड
  • छपरा-खैरा रोड

कब जागेगा सिस्टम?

लगातार हो रही दुर्घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि सड़क सुरक्षा को लेकर तत्काल और ठोस कदम उठाने की जरूरत है. सुरक्षित पार्किंग, रिफ्लेक्टर की अनिवार्यता, हाईवे पेट्रोलिंग, बेहतर रोशनी और अवैध अतिक्रमण हटाने जैसे उपायों के बिना एनएच और एसएच पर मौत का यह सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा.

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By Sakshi Kumari

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