सारण से अमित की रिपोर्ट
Saran MGNREGA Dispute: सारण के जलालपुर प्रखंड के अनवल पंचायत में मनरेगा को लेकर चल रहा विवाद अब नए मोड़ सामने आया है. कथित भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच अब फर्जी लेटर पैड और हस्ताक्षर के इस्तेमाल का मामला सामने आया है. मुखिया प्रतिनिधि वीरन कुमार ने पूर्व उप प्रमुख संजय राय पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनके नाम से दिया गया आवेदन फर्जी है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.
क्या है नया विवाद?
सारण के अनवल पंचायत में मनरेगा योजनाओं को लेकर पहले से विवाद चल रहा है. इसी बीच मुखिया प्रतिनिधि वीरन कुमार ने आरोप लगाया है कि पंचायत की मुखिया शालिनी देवी के लेटर पैड और कथित हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर एक आवेदन प्रस्तुत किया गया, जबकि ऐसा कोई आवेदन उनकी ओर से नहीं दिया गया है. मुखिया प्रतिनिधि वीरन कुमार का कहना है कि संबंधित आवेदन उन्होंने न तो तैयार किया है और न ही किसी को ऐसा करने के लिए अधिकृत किया है. उन्होंने कहा कि आवेदन पर मौजूद हस्ताक्षर और लेटर पैड के इस्तेमाल की जांच कराई जानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके.
इस मामले से कौन-कौन से सवाल खड़े हो रहे हैं?
मामले के सामने आने के बाद कई सवाल उठने लगे हैं. यदि मुखिया प्रतिनिधि का दावा सही है तो उनके नाम से आवेदन किसने तैयार किया. आवेदन पर इस्तेमाल किया गया लेटर पैड और हस्ताक्षर कहां से आए. क्या किसी ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर प्रशासन को गुमराह करने का प्रयास किया है. इन सवालों को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है.
पूर्व उप प्रमुख संजय राय ने आरोपों पर क्या कहा?
विवाद को लेकर पूर्व उप प्रमुख संजय राय ने आरोपों को खारिज किया है. उनका कहना है कि संबंधित लेटर मुखिया की ओर से दिया गया है और इसमें किसी प्रकार की फर्जीवाड़े की बात नहीं है. उन्होंने कहा कि दस्तावेज पूरी तरह वैध हैं.
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मनरेगा विवाद की शुरुआत कैसे हुई थी?
गौरतलब है कि 15 जून को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत पूर्व उप प्रमुख संजय राय ने प्रेस वार्ता आयोजित की थी. इस दौरान उन्होंने जलालपुर प्रखंड की अनवल, देवरिया, समहोता समेत कई पंचायतों में मनरेगा योजनाओं में कथित अनियमितताओं और फर्जी हाजिरी बनाए जाने के आरोप लगाए थे.
प्रेस वार्ता के बाद नया विवाद क्यों चर्चा में है?
प्रेस वार्ता के दौरान मनरेगा से जुड़े कई दस्तावेज सार्वजनिक किए गए थे. हालांकि, प्रेस वार्ता के दो दिन के भीतर ही लेटर पैड और हस्ताक्षर को लेकर नया विवाद सामने आ गया. इससे पूरे मामले ने नया राजनीतिक और प्रशासनिक मोड़ ले लिया है. दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बीच मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है. यदि जांच होती है तो आवेदन, हस्ताक्षर और लेटर पैड की सत्यता स्पष्ट हो सकेगी. इसके बाद ही यह तय हो पाएगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है.
