Saran Flood News: सारण जिले में गंगा के बढ़ते जलस्तर ने अब ग्रामीण इलाकों में तबाही का रूप लेना शुरू कर दिया है. दिघवारा के गंगा पार स्थित अकिलपुर पंचायत के सभी आठ गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं. सड़क से लेकर घरों और खेत-खलिहानों तक पानी फैल जाने से जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है. बड़ी संख्या में ग्रामीण सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं.
हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिस नदी का पानी पहले सड़क से करीब 10 किलोमीटर दूर हुआ करता था, वही पानी अब पूरी सड़क को अपने आगोश में ले चुका है. सड़कों पर पानी जमा होने के कारण लोगों की सामान्य आवाजाही बाधित हो गई है. ग्रामीण नाव और स्थानीय स्तर पर बनाए गए जुगाड़ के सहारे एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंच रहे हैं.
घर-खेत डूबे, पलायन को मजबूर ग्रामीण
अकिलपुर पंचायत के आठों गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश करने से बड़ी संख्या में घर प्रभावित हुए हैं. कई मकान पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं. घरों में पानी भरने के बाद लोग जरूरी सामान लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर निकल रहे हैं. कई परिवारों के सामने रहने और खाने की समस्या खड़ी हो गई है.
बाढ़ के पानी ने खेत-खलिहानों को भी अपनी चपेट में ले लिया है. मक्का और सब्जियों की फसलें पानी में डूबने से किसानों को भारी नुकसान की आशंका है. लंबे समय तक पानी जमा रहने से फसलों के पूरी तरह बर्बाद होने का खतरा बना हुआ है.
सड़क डूबी, नाव बनी आवाजाही का सहारा
बाढ़ के कारण अकिलपुर और दिघवारा के बीच संपर्क भी प्रभावित हुआ है. सड़क मार्ग डूबने के बाद लोगों के लिए नाव ही आवाजाही का प्रमुख साधन बन गई है. प्रशासन की ओर से अकिलपुर और दिघवारा के बीच लोगों की आवाजाही के लिए आठ नावें उपलब्ध कराई गई हैं.
इसके बावजूद ग्रामीणों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. रोजमर्रा के काम, जरूरी सामान की खरीदारी और इलाज के लिए लोगों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है.
स्कूल और सरकारी कार्यालय भी पानी में
बाढ़ का असर सरकारी संस्थानों पर भी पड़ा है. कई सरकारी स्कूलों और कार्यालयों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है. रास्ते डूब जाने के कारण इन संस्थानों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है. इससे सामान्य सरकारी कामकाज और बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होने की स्थिति बन गई है.
घरों में बंद चूल्हा, सूखे भोजन पर निर्भर लोग
बाढ़ से सबसे ज्यादा परेशानी उन परिवारों को हो रही है, जिनके घरों में पानी प्रवेश कर गया है. कई घरों में चूल्हा-चौका बंद हो चुका है और लोग सूखे भोजन के सहारे दिन गुजार रहे हैं. मवेशियों के लिए हरे चारे की समस्या भी गंभीर होती जा रही है. कई परिवार अपने पालतू मवेशियों को घरों से निकालकर सड़क या ऊंचे स्थानों पर रखने को मजबूर हैं.
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ का पानी बढ़ने के साथ भोजन, पीने के पानी, पशुचारा और दवाइयों की जरूरत भी बढ़ रही है.
बीमारी और जहरीले जीवों का बढ़ा खतरा
बाढ़ के पानी के बीच लोगों को चिकित्सीय सुविधाओं की कमी की चिंता भी सता रही है. जलजमाव के कारण सांप और जहरीले कीड़े-मकोड़ों का खतरा बढ़ गया है. ग्रामीणों को आशंका है कि पानी और बढ़ने पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं. ऐसे में प्रभावित इलाकों में चिकित्सा सुविधा और जरूरी दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने की मांग की जा रही है.
अकिलपुर थाना परिसर भी पानी में डूबा
बाढ़ की चपेट से अकिलपुर थाना परिसर भी नहीं बच सका है. थाना परिसर में बाढ़ का पानी घुस जाने से पुलिसकर्मियों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. परिसर में खड़े सैकड़ों जब्त वाहन पानी में डूब गए हैं. इससे वाहनों को नुकसान होने की आशंका है.
प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है. अकिलपुर और दिघवारा के बीच नावों की व्यवस्था की गई है, ताकि जरूरी आवाजाही जारी रह सके. ग्रामीणों की मांग है कि प्रभावित परिवारों के लिए राहत सामग्री, सूखा भोजन, पशुचारा, दवाइयां और चिकित्सा टीम की पर्याप्त व्यवस्था की जाए.
फिलहाल सारण के दिघवारा-अकिलपुर इलाके में बाढ़ की तस्वीरें हालात की गंभीरता खुद बयां कर रही हैं. सड़क, खेत, घर और सरकारी परिसर तक पानी पहुंचने से ग्रामीणों के सामने अपनी जिंदगी, घर और फसल बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है.
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