Saran Double Decker Flyover: सारण शहर में वर्षों पुरानी जाम की समस्या से निजात दिलाने के उद्देश्य से शुरू की गयी डबल डेकर परियोजना अब खुद लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है. निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार और कई प्रमुख सड़कों के अवरुद्ध होने से शहर की बड़ी आबादी प्रभावित है. स्थिति यह है कि कई इलाकों में वैकल्पिक रास्ते भी बंद या बेहद खराब होने के कारण स्कूली बच्चों को रोजाना परेशानी उठानी पड़ रही है. कई बच्चे समय पर स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं और उन्हें वापस लौटना पड़ रहा है.
करीब चार साल में पूरा होने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना को शुरू हुए करीब आठ वर्ष हो चुके हैं, लेकिन अब भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है. परियोजना की लागत भी निर्माण अवधि के दौरान लगातार बढ़ी है. इससे लोगों में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर शहर को जाम से राहत देने वाली परियोजना कब पूरी होगी.
जाम खत्म करने के लिए बनी योजना, खुद बन गयी जाम की वजह
डबल डेकर परियोजना की आधारशिला 11 जुलाई 2018 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने छपरा पुलिस लाइन मैदान में रखी थी. उस समय परियोजना को शहर की यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने वाली योजना बताया गया था.
योजना के तहत भिखारी ठाकुर चौक से गांधी चौक, नगरपालिका चौक होते हुए बस स्टैंड तक डबल डेकर फ्लाईओवर का निर्माण किया जाना है. परियोजना की लंबाई करीब 3.5 किलोमीटर है. ऊपरी और निचली डेक को मिलाकर इसकी कुल निर्माण लंबाई करीब सात किलोमीटर बतायी गयी है.
शुरुआती योजना के अनुसार परियोजना को जून 2022 तक पूरा किया जाना था. लेकिन तय समय सीमा बीतने के बाद भी निर्माण पूरा नहीं हो सका. अब विभागीय स्तर पर मार्च 2027 तक इसे पूरा करने की उम्मीद जतायी जा रही है.
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आठ साल से निर्माण, परेशानी झेल रही करीब 50 हजार आबादी
परियोजना के निर्माण से शहर के कई प्रमुख मोहल्ले और व्यावसायिक इलाके लंबे समय से प्रभावित हैं. दावा है कि वार्ड संख्या 23 से 40 तक करीब 50 हजार की आबादी किसी न किसी रूप में निर्माण कार्य की वजह से परेशान है.
सबसे बड़ी समस्या आवागमन की है. जगह-जगह निर्माण सामग्री, बैरिकेडिंग और बंद रास्तों के कारण लोगों को लंबा रास्ता तय करना पड़ता है. कई जगहों पर वैकल्पिक मार्ग भी पर्याप्त नहीं हैं.
स्कूल जाने वाले बच्चों की बढ़ी मुश्किल
निर्माण कार्य के कारण कई रास्ते बंद होने का असर अब बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है. कई परिवारों का कहना है कि सुबह स्कूल जाने के समय जाम और अवरुद्ध रास्तों के कारण बच्चों को समय पर स्कूल पहुंचाना मुश्किल हो रहा है.
कुछ स्थानों पर आवागमन का रास्ता इतना प्रभावित है कि बच्चों को काफी घूमकर स्कूल जाना पड़ता है. वहीं निर्माण क्षेत्र के आसपास सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की चिंता भी बढ़ी है.
फोटो कैप्शन: डबल डेकर निर्माणाधीन क्षेत्र में स्कूल जाते बच्चे व मेघवाल चौक पर लगाया गया अवरोध
व्यापारियों पर भी पड़ा सबसे बड़ा असर
डबल डेकर निर्माण की शुरुआत के बाद सबसे ज्यादा असर सड़क किनारे कारोबार करने वाले लोगों पर पड़ा है. स्थानीय स्तर पर उपलब्ध आकलन के अनुसार अब तक दो हजार से अधिक कारोबार प्रभावित हुए हैं, जबकि एक हजार से अधिक फुटपाथी दुकानदारों की रोजी-रोटी पर असर पड़ा है.
कई स्थायी दुकानदारों का कारोबार लंबे समय से प्रभावित है. स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ दुकानदारों ने दुकान और कारोबार चलाने के लिए कर्ज लिया था, लेकिन लगातार घटते कारोबार के कारण उनके सामने कर्ज चुकाने की चुनौती खड़ी हो गयी है.
500 से अधिक परिवारों पर भी असर का दावा
निर्माण क्षेत्र से जुड़े इलाकों में रहने वाले सैकड़ों परिवार भी लगातार परेशानी झेल रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले निर्माण के लिए तोड़फोड़ और जमीन से जुड़े विवादों की समस्या थी, अब रास्ते बंद होने और आवागमन प्रभावित होने से रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल हो गयी है.
परियोजना के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शहर के प्रमुख बाजार और संपर्क मार्ग शामिल हैं.
ये प्रमुख रास्ते हुए प्रभावित
- नगरपालिका चौक से सलेमपुर
- सलेमपुर से शिल्पी सिनेमा रोड
- मोना चौक से सरकारी बाजार रोड
- मोना चौक से कचहरी स्टेशन रोड
- मोना चौक से कटहरी बाग रोड
- मोना नीम से मोना मिश्रा टोली रोड
- मोना रोड से दलदली बाजार रोड
- सलेमपुर चौक से छपरा व्यवहार न्यायालय रोड
- गांधी चौक से नेहरू चौक रोड
- नेहरू चौक से हवाई अड्डा क्षेत्र की ओर जाने वाला मार्ग
- इसके अलावा करीब 22 अन्य ब्रांच सड़कें भी निर्माण से प्रभावित हैं
411 करोड़ से शुरू हुई योजना, अब करीब 696 करोड़
डबल डेकर परियोजना की शुरुआती लागत करीब 411 करोड़ रुपये निर्धारित की गयी थी. निर्माण में देरी और अन्य कारणों के चलते परियोजना की लागत में बड़ा बदलाव हुआ. जुलाई 2025 में बिहार कैबिनेट ने संशोधित लागत के रूप में करीब 696.26 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी.
यानी शुरुआती लागत की तुलना में परियोजना का बजट काफी बढ़ चुका है. इसके बावजूद निर्धारित अवधि में निर्माण पूरा नहीं होने को लेकर शहरवासियों में नाराजगी है.
परियोजना में 1558 पाइल्स और 467 बीम का प्रावधान
परियोजना के निर्माण में कुल 1558 पाइल्स और 467 बीम लगाये जाने का प्रावधान बताया गया है. करीब 3.5 किलोमीटर लंबे मुख्य फ्लाईओवर के निर्माण के साथ शहर के कई महत्वपूर्ण जंक्शन और संपर्क मार्ग भी इससे जुड़े हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े प्रोजेक्ट के पूरा होने में देरी का सीधा असर शहर की यातायात व्यवस्था और कारोबार पर पड़ रहा है.
पटना में शुरू हुई बाद की परियोजना पूरी, छपरा अब भी इंतजार में
स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि छपरा में डबल डेकर परियोजना शुरू होने के बाद पटना में भी इसी तरह की परियोजना पर काम शुरू हुआ और वहां निर्माण पूरा हो गया, जबकि छपरा की परियोजना अभी तक पूरी नहीं हो सकी है.
इसी तुलना को लेकर लोग निर्माण एजेंसी और प्रशासन से काम में तेजी लाने की मांग कर रहे हैं.
लागत बढ़ी, अब समय सीमा पर टिकी लोगों की नजर
परियोजना की लागत बढ़ने के बाद अब शहरवासियों की नजर इसके पूरा होने की नई समय सीमा पर है. अगर मार्च 2027 तक काम पूरा होता है तो लोगों को उम्मीद है कि शहर की यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव आयेगा और लंबे समय से चली आ रही परेशानी खत्म होगी.
लेकिन तब तक निर्माण क्षेत्र में रहने वाले लोगों, दुकानदारों, राहगीरों और स्कूली बच्चों को मौजूदा समस्याओं का सामना करना पड़ेगा.
अधिकारी बोले- मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य
पुल निर्माण निगम के कार्यपालक अभियंता अमित कुमार शाही ने बताया कि डबल डेकर का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है. विभाग को उम्मीद है कि मार्च 2027 तक परियोजना पूरी कर ली जायेगी.
उन्होंने कहा कि आम लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक मार्गों को भी दुरुस्त किया जा रहा है. विभाग का प्रयास है कि निर्माण कार्य जल्द से जल्द पूरा कर लोगों को राहत दी जाये.
अब सवाल सिर्फ पुल पूरा होने का नहीं, शहर को राहत मिलने का है
डबल डेकर परियोजना छपरा की यातायात व्यवस्था को बदलने के उद्देश्य से शुरू की गयी थी, लेकिन लंबे समय से जारी निर्माण कार्य ने शहर के कारोबार, आवागमन और आम जनजीवन को प्रभावित किया है. अब परियोजना की लागत करीब 696 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है और नई समय सीमा मार्च 2027 निर्धारित की गयी है.
ऐसे में शहरवासियों की नजर इस बात पर है कि क्या इस बार तय समय सीमा में काम पूरा हो पाता है या फिर उन्हें एक और समय सीमा का इंतजार करना पड़ेगा.
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