MLC Chunav : बिहार विधान परिषद के शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए राजद की ओर से छह उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद पार्टी के अंदर असंतोष के स्वर उठने लगे हैं. सारण लोकसभा की पूर्व प्रत्याशी डॉ. रोहिणी आचार्य ने टिकट वितरण को लेकर पार्टी नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े किये हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से पार्टी के साथ जुड़े समर्पित नेताओं और कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर नये और अवसरवादी चेहरों को प्राथमिकता दी जा रही है.
दशकों से पार्टी के साथ खड़े नेताओं की अनदेखी का आरोप
राजद के पूर्व जिला प्रवक्ता हरेलाल यादव ने रोहिणी आचार्य के हवाले से बयान जारी किया है. इसमें उन्होंने कहा है कि दशकों से हर परिस्थिति में पार्टी के साथ मजबूती से खड़े रहे नेताओं की उपेक्षा संगठन के लिए आत्मघाती कदम साबित हो सकती है.
रोहिणी आचार्य ने कहा कि वैचारिक निष्ठा और लंबे संघर्ष को दरकिनार कर चुनाव से ठीक पहले पार्टी में आये लोगों को महत्व देना निष्ठावान नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों का अपमान है. उन्होंने कहा कि जिन कार्यकर्ताओं ने वर्षों तक संघर्ष किया और कठिन परिस्थितियों में पार्टी को मजबूत किया, उन्हें टिकट प्रक्रिया में नजरअंदाज किया जाना गंभीर चिंता का विषय है.
आंतरिक लोकतंत्र और संगठन पर उठाये सवाल
रोहिणी आचार्य ने टिकट वितरण के फैसले को समर्पित लालूवादियों के साथ वादाखिलाफी बताया. उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसलों से पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र, जमीनी कैडर और संगठनात्मक मजबूती पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है.
उन्होंने राजद की मूल विचारधारा और सिद्धांतों के प्रति पार्टी नेतृत्व की प्रतिबद्धता को लेकर भी सवाल उठाये. उनका कहना है कि लंबे समय से पार्टी के लिए संघर्ष करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं की भूमिका को नजरअंदाज कर चुनाव से ठीक पहले पार्टी में आने वाले लोगों को महत्व दिया जाना संगठन के लिए गंभीर चिंता का विषय है.
