Neha Kumari eye donation: मढ़ौरा प्रखंड के गौरा बाजार हथिसार निवासी राधेश्याम साह की पुत्री स्वर्गीय नेहा कुमारी की मृत्यु के बाद पटना स्थित आइजीआइएमएस में उनका नेत्रदान कराया गया था. महज 13 वर्ष की उम्र में नेत्रदान कर नेहा कुमारी ने समाज के सामने मानवता और परोपकार की मिसाल पेश की. शनिवार को दधीचि देहदान समिति, छपरा के प्रतिनिधिमंडल ने उनके परिजनों से उनके आवास पर मुलाकात की.
नौ अगस्त को राज्यस्तरीय कार्यक्रम में शामिल होने का मिला निमंत्रण
दधीचि देहदान समिति के प्रतिनिधिमंडल ने नेहा कुमारी के परिजनों को नौ अगस्त को अंतरराष्ट्रीय अंगदान दिवस के अवसर पर आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया. समिति के अध्यक्ष संजीव चौधरी, संयुक्त सचिव शैलेंद्र पुरी एवं मीडिया प्रभारी विपिन मिश्रा ने परिवार से मुलाकात कर उन्हें पटना चलकर कार्यक्रम में शामिल होने का आग्रह किया.
राज्यपाल और मुख्यमंत्री कर सकते हैं परिवार को सम्मानित
समिति की ओर से बताया गया कि राज्यस्तरीय कार्यक्रम में स्वर्गीय नेहा कुमारी के परिजनों को राज्यपाल, मुख्यमंत्री सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों द्वारा सम्मानित किए जाने का प्रस्ताव है. समिति का उद्देश्य नेत्रदान जैसे महान मानवीय कार्य के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना और अधिक से अधिक लोगों को अंगदान एवं नेत्रदान के लिए प्रेरित करना है.
13 साल की उम्र में नेत्रदान कर पेश की मिसाल
स्वर्गीय नेहा कुमारी ने मात्र 13 वर्ष की उम्र में नेत्रदान कर बिहार में कम उम्र की नेत्रदानी के रूप में एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया. उनके इस निर्णय से न केवल जरूरतमंद लोगों को रोशनी की उम्मीद मिली, बल्कि समाज में अंगदान और नेत्रदान को लेकर सकारात्मक संदेश भी गया.
नेहा के परिवार को सम्मानित कर लोगों को जागरूक करने की पहल
दधीचि देहदान समिति का प्रयास है कि नेहा कुमारी के परिवार को राज्य स्तर पर सम्मान दिलाकर उनके त्याग और मानवीय भावना को समाज के सामने रखा जाए. समिति का मानना है कि इस तरह के उदाहरण लोगों को नेत्रदान और अंगदान के लिए आगे आने के लिए प्रेरित करेंगे. नेहा कुमारी का योगदान समाज के लिए लंबे समय तक प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा.
इसे भी पढ़ें: हुजूर! बेटियों की पीड़ा कौन सुनेगा? कटेया के स्कूल में टॉयलेट बंद, झाड़ियों का सहारा लेने को मजबूर छात्राएं
