सारण: मढ़ौरा चीनी मिल की वापसी पर फिर संकट, तरैया में नई मिल की चर्चा से बढ़ा विरोध

मढ़ौरा चीनी मिल के पुनर्जीवन की उम्मीदों के बीच तरैया में नई चीनी मिल स्थापित करने की तैयारी की खबर से स्थानीय लोगों और नेताओं में नाराजगी है. लोग मढ़ौरा की औद्योगिक विरासत को बचाने की मांग कर रहे हैं.

Marhaura Sugar Mill: तीन दशक से खंडहर में तब्दील मढ़ौरा चीनी मिल के दिन बहुरने की उम्मीद एक बार फिर धूमिल होती नजर आ रही है. नवंबर 2025 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने संकल्प पत्र में मढ़ौरा समेत राज्य में नई चीनी मिलों की स्थापना का वादा किया था. इससे स्थानीय लोगों में लंबे समय बाद नई उम्मीद जगी थी. लेकिन अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार के अधीन गन्ना उद्योग विभाग के एक नए कदम ने इलाके में नई बहस छेड़ दी है.

तरैया में मिल स्थापना की सुगबुगाहट से बढ़ा विरोध

जानकारी के अनुसार, 'समृद्ध उद्योग–सशक्त बिहार' योजना के तहत गन्ना उद्योग विभाग ने मढ़ौरा के बजाय तरैया अंचल के रामकोला फार्म हाउस की जमीन को नई चीनी मिल के लिए उपयुक्त माना है. इस संबंध में 16 जुलाई 2026 को जिला प्रशासन को भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं.

इस सूचना के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों में नाराजगी बढ़ गई है. राजद नेता विष्णु गुप्ता सहित कई लोगों ने कहा कि मढ़ौरा की ऐतिहासिक औद्योगिक पहचान को समाप्त नहीं होने दिया जाएगा. उनका कहना है कि जब मढ़ौरा में पहले से चीनी मिल की पर्याप्त भूमि उपलब्ध है, तो नई मिल का निर्माण या पुरानी मिल का पुनर्जीवन यहीं किया जाना चाहिए.

कभी उद्योग का बड़ा केंद्र था मढ़ौरा

ब्रिटिश शासनकाल में वर्ष 1902 में स्थापित मढ़ौरा चीनी मिल कभी पूरे इलाके की आर्थिक धुरी मानी जाती थी. उत्तर प्रदेश के बलिया निवासी विवेकानंद सिंह बताते हैं कि आजादी की स्वर्ण जयंती के आसपास यानी वर्ष 1997 तक आते-आते मढ़ौरा का औद्योगिक वैभव धीरे-धीरे खत्म होने लगा. एक-एक कर चीनी मिल, मार्टन फैक्ट्री, सारण इंजीनियरिंग और शराब मिल बंद हो गईं.

इतिहास की गवाही देते अवशेष

कभी अंग्रेजों के दौर का प्रसिद्ध 'मढ़ौरा क्लब' बिलियर्ड्स और टेनिस जैसे खेलों के लिए जाना जाता था, लेकिन आज उसका अस्तित्व लगभग समाप्त हो चुका है. मढ़ौरा डिस्टिलरी कारखाने के 105 वर्षीय पूर्व कर्मी ललित राय बताते हैं कि ब्रिटिश काल में यह इलाका औद्योगिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था और यहां अंग्रेज अधिकारियों की लगातार आवाजाही रहती थी.

विरासत बचाने की तैयारी में स्थानीय लोग

तरैया में नई चीनी मिल स्थापित करने की चर्चा के बीच मढ़ौरा के लोग अपनी औद्योगिक विरासत को बचाने के लिए आंदोलन के मूड में दिखाई दे रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि नई मिल यदि स्थापित करनी है तो मढ़ौरा की ऐतिहासिक पहचान और पहले से उपलब्ध आधारभूत ढांचे को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.

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By मनोकामना सिंह

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