सारण: बाढ़ में पति-पतोहू डॉक्टर बुलाने नाव से निकले, घर में अकेली महिला ने दम तोड़ा

सारण में बाढ़ का संकट गंभीर हो गया है, जहां एक गांव पूरी तरह से पानी से घिर गया है. बाढ़ में फंसी एक महिला की मौत तब हो गई जब उसके परिजन तबीयत बिगड़ने पर डॉक्टर बुलाने नाव से निकले थे. यह घटनाक्रम स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

saran News : दाहा नदी का रिंग बांध टूटने के बाद प्रखंड के इमादपुर बिनटोली गांव में बाढ़ का संकट गहरा गया है. करीब 200 घरों और 1200 से 1500 की आबादी वाला यह गांव चारों तरफ से पानी से घिर गया है. प्रखंड मुख्यालय से गांव का संपर्क कट गया है और लोगों की आवाजाही नाव के सहारे हो रही है. इसी बीच गुरुवार की रात बाढ़ में फंसे एक परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टर को बुलाने और दवा लाने गये पति और पतोहू जब तक वापस लौटते, घर में अकेली 65 वर्षीय मानकी देवी की मौत हो चुकी थी.

तबीयत बिगड़ी तो नाव से डॉक्टर बुलाने निकले पति-पतोहू

ग्रामीणों के अनुसार इमादपुर बिनटोली निवासी मानकी देवी की गुरुवार की रात अचानक तबीयत बिगड़ गयी. उनकी हालत देखकर पति प्रभु प्रसाद और पतोहू डॉक्टर को बुलाने तथा दवा लाने के लिए नाव से ताजपुर गये थे. इसी दौरान घर में अकेली पड़ी मानकी देवी की हालत और बिगड़ गयी और उन्होंने दम तोड़ दिया.

परिजनों के वापस लौटने के बाद महिला की मौत की जानकारी हुई. मृतका के दोनों पुत्र रोजी-रोटी के सिलसिले में प्रदेश में मजदूरी करते हैं. ऐसे में परिवार के सामने एक साथ कई तरह का संकट खड़ा हो गया है.

नाव से ही बाहर लाया जायेगा शव

गांव में चारों तरफ बाढ़ का पानी जमा होने के कारण मृतका के शव को दाह संस्कार के लिए सड़क मार्ग से बाहर ले जाना संभव नहीं है. ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन की ओर से गांव में पहले से दो नावें चलायी जा रही हैं. इन्हीं नावों के सहारे लोगों की आवाजाही हो रही है. मानकी देवी के शव को भी दाह संस्कार के लिए नाव से ही गांव से बाहर ले जाया जायेगा.

पानी जमा होने के कारण गांव में कई जगहों पर पैदल निकलना भी मुश्किल है. ऐसे में शव को कंधे पर लेकर जाने की स्थिति नहीं है.

शाम होते ही गांव में स्वास्थ्य सेवा बंद होने का आरोप

ग्रामीणों ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाये हैं. उनका कहना है कि डॉक्टरों की टीम सुबह से शाम तक इमादपुर बिनटोली से करीब 600 मीटर दूर उड़ियानपुर में बैठती है. शाम होते ही टीम वहां से चली जाती है. इसके बाद रात में किसी की तबीयत बिगड़ने पर ग्रामीणों के पास इंतजार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता.

ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के दौरान रात में स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध नहीं रहने से लोगों की परेशानी और बढ़ गयी है. मानकी देवी की मौत के बाद ग्रामीणों में इस बात को लेकर चिंता और गहरी हो गयी है कि आपात स्थिति में मरीजों को तत्काल इलाज कैसे मिलेगा.

पानी जमा रहने से सड़ांध और बीमारी का खतरा

लगातार बाढ़ का पानी जमा रहने से इमादपुर बिनटोली समेत आसपास के इलाके में सड़ांध और बदबू फैलने लगी है. ग्रामीणों के अनुसार पानी के लंबे समय तक जमा रहने से संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. बाढ़ प्रभावित लोगों को साफ पानी, दवा और स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरत है.

ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव में नियमित दवा का छिड़काव कराने और पर्याप्त मात्रा में दवाओं का स्टॉक उपलब्ध कराने की मांग की है.

24 घंटे डॉक्टर की तैनाती की मांग

चेफुल पैक्स अध्यक्ष संत सिंह, राम अयोध्या प्रसाद, सुफियान अली अंसारी, सवालिया प्रसाद, उप सरपंच मुकुर्धन प्रसाद, उमरावती देवी, सागर प्रसाद समेत अन्य ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से इमादपुर बिनटोली में 24 घंटे स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने की मांग की है.

ग्रामीणों ने कहा कि बाढ़ की स्थिति में गांव का संपर्क मुख्यालय से कट गया है. ऐसे में स्वास्थ्यकर्मी और दवाएं गांव के पास उपलब्ध रहना जरूरी है. उन्होंने स्थायी रूप से डॉक्टर की तैनाती करने, पर्याप्त दवाओं का स्टॉक रखने और नियमित दवा छिड़काव कराने की मांग की है, ताकि इलाज के अभाव में किसी और की जान न जाये.

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By चंद्रशेखर कुमार

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