Madhaura Sugar Mill: स्थानीय बंद चीनी मिल परिसर में रविवार को युवाओं और स्थानीय गणमान्य लोगों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गयी. बैठक में पिछले तीन दशकों से बंद पड़ी मढ़ौरा चीनी मिल को तरैया के रामकोला में स्थापित करने की गन्ना उद्योग विभाग की कथित पहल को लेकर गहरी चिंता जतायी गयी.
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि मढ़ौरा की ऐतिहासिक चीनी मिल को किसी अन्य स्थान पर ले जाने के बजाय मढ़ौरा में ही पुनर्जीवित किया जाना चाहिए. वक्ताओं ने कहा कि चीनी मिल केवल एक औद्योगिक इकाई नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की सांस्कृतिक और आर्थिक विरासत है. इसे मढ़ौरा से स्थानांतरित करने की किसी भी कोशिश का स्थानीय स्तर पर विरोध किया जाएगा.
मिल को मढ़ौरा में ही शुरू करने की मांग
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि दशकों से बंद पड़ी चीनी मिल के कारण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. मिल के दोबारा चालू होने से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलने के साथ किसानों को भी लाभ होगा.
स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की कि बंद पड़ी चीनी मिल को मढ़ौरा में ही पुनर्जीवित करने की दिशा में ठोस पहल की जाए. उन्होंने कहा कि मिल के स्थानांतरण के बजाय मौजूदा परिसर और आधारभूत संरचना का उपयोग कर इसे फिर से शुरू करने की योजना बनायी जानी चाहिए.
सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
बैठक में मौजूद लोगों ने सरकार और प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि इस दिशा में जल्द सकारात्मक पहल नहीं की गयी, तो मढ़ौरा के घर-घर से लोग एकजुट होकर चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने को मजबूर होंगे.
वक्ताओं ने कहा कि मढ़ौरा की चीनी मिल से क्षेत्र के लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं. इसलिए इसके भविष्य को लेकर किसी भी निर्णय में स्थानीय लोगों की भावनाओं और हितों को ध्यान में रखना जरूरी है.
सैकड़ों लोग बैठक में हुए शामिल
राजद व्यवसायी प्रकोष्ठ के नेता विष्णु गुप्ता के संचालन में आयोजित बैठक में कांग्रेस नेता लालबाबू गिरी, नीरज कुमार सिंह, आदित्य कुमार, अतुल प्रताप सिंह, मनोज गुप्ता, युवराज भास्कर, उप मुखिया अजीत कुमार सिंह, बीडीसी मोहन साह, अतुल सिंह, आलोक सिंह, चित्रमणि सिंह, अभिषेक राय और राकेश रंजन सहित सैकड़ों स्थानीय लोग उपस्थित रहे.
बैठक के दौरान लोगों ने मढ़ौरा चीनी मिल को किसी अन्य स्थान पर ले जाने के बजाय मढ़ौरा में ही पुनर्जीवित करने की मांग को लेकर एकजुटता दिखायी.
