saran News : पानापुर थाना क्षेत्र के भोरहा गांव में एक महिला की मृत्यु के बाद कथित तौर पर फर्जी बीमा दावा कर बीमित राशि हड़पने का मामला सामने आया है. मामले में आरकेआरएम ग्लोबल, बीकेसी मुंबई के लीगल फील्ड ऑफिसर देवर्षि शुक्ला ने पानापुर थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी है. प्राथमिकी में संदिग्ध बीमा, धोखाधड़ी, छल, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र का आरोप लगाया गया है. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
10 लाख रुपये की बीमा पॉलिसी और फिर मौत का दावा
प्राथमिकी के अनुसार भोरहा गांव निवासी श्रीभगवान भगत की पत्नी लक्ष्मीना देवी के नाम से बंधन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की बंधन लाइफ गारंटी विश्वास योजना के तहत 10 लाख रुपये की बीमा पॉलिसी 12 अप्रैल 2025 से प्रभावी हुई थी. पॉलिसी में श्रीभगवान भगत को नामांकित व्यक्ति बनाया गया था.
प्राथमिकी में कहा गया है कि इसके बाद श्रीभगवान भगत की ओर से दस्तावेज प्रस्तुत कर दावा किया गया कि लक्ष्मीना देवी की मृत्यु 29 मई 2025 को हार्ट अटैक से हुई थी. जांच अधिकारी सरफराज सरवर की जांच के बाद दावा राशि का भुगतान कर दिया गया.
दोबारा जांच में सामने आया अलग तथ्य
मामले में मार्च 2026 में कन्वर्जेन्ट सर्विस मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड से दोबारा जांच करायी गयी. प्राथमिकी में दर्ज जानकारी के अनुसार इस जांच में दावा की गयी मृत्यु की तारीख को लेकर गंभीर अंतर सामने आया.
जांच में आरोप लगाया गया कि लक्ष्मीना देवी की मृत्यु बीमा पॉलिसी जारी होने और जोखिम शुरू होने से पहले ही फरवरी 2025 में हो गयी थी. इसके अलावा जांच में यह भी सामने आने की बात कही गयी कि लक्ष्मीना देवी लंबे समय से बीमार थीं और पटना तथा गोरखपुर में उनका इलाज चल रहा था.
फेसबुक प्रोफाइल से भी फरवरी में मौत का दावा
प्राथमिकी में कहा गया है कि मृतका के पुत्र के फेसबुक प्रोफाइल की जांच से भी उनकी मृत्यु फरवरी 2025 में होने की जानकारी मिलने का दावा किया गया है. इसके आधार पर बीमा दावा और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर संदेह उत्पन्न हुआ.
मामले में लीगल फील्ड ऑफिसर की ओर से संबंधित लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र समेत अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की गयी है.
पुलिस कर रही मामले की छानबीन
पानापुर थानाध्यक्ष संजीत कुमार ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर ली गयी है. पुलिस मामले की छानबीन कर रही है. जांच के दौरान बीमा पॉलिसी से जुड़े दस्तावेज, मृत्यु की वास्तविक तारीख और दावा राशि के भुगतान से संबंधित तथ्यों की जांच की जा रही है.
