saran news : दिघवारा के सात सरकारी स्कूलों का पटना के दानापुर से होता है नियंत्रण व अनुश्रवण

saran news : दानापुर से नियंत्रित होनेवाले स्कूलों में अकिलपुर पंचायत में चार प्राथमिक, दो मध्य व एक प्लस टू विद्यालय शामिलस्कूल सारण में, जबकि नियंत्रण पटना से होने से शिक्षक-शिक्षिकाओं व अ��िभावकों को होती है परेशानी

saran news : दिघवारा. दिघवारा प्रखंड का एक पंचायत ऐसा है, जो सारण जिले में स्थित है, लेकिन इस पंचायत में अवस्थित सात सरकारी विद्यालयों का नियंत्रण पटना जिले से होता है.

ऐसे में आप सहज समझ सकते हैं कि स्कूलों के संचालन व अनुश्रवण में पंचायत प्रतिनिधियों के साथ अभिभावकों व शिक्षक-शिक्षिकाओं को भी अपने-अपने कार्यों के लिए कितनी परेशानी झेलनी पड़ती होगी. वहीं विभाग को इन विद्यालयों में संचालित हो रहे सरकारी योजनाओं की अपडेट जानकारी लेने में भी परेशानी उठानी पड़ती है. जी हां, चौंकिये नहीं, यही सच्चाई है. सारण जिले के दिघवारा प्रखंड में 10 पंचायतें हैं और इसमें से अकिलपुर पंचायत गंगा के उस पार स्थित है. इस पंचायत की शक्ल एक टापू जैसी है और यह पंचायत चारों ओर से गंगा से घिरा हुआ है. लगभग 80 हजार की आबादी और 12 हजार वोटरों वाली इस पंचायत में कुल 20 वार्ड हैं. सरकारी स्कूलों की बात करें, तो इस पंचायत में चार प्राथमिक विद्यालय हैं, जो बाकरपुर, अकिलपुर, बतरौली और बभनगामा बंगला पर स्थित है. दो मध्य विद्यालय दूधिया और अकिलपुर में स्थित है, वहीं एक प्लस टू स्कूल अकिलपुर में स्थित है.

स्वास्थ्य, राजस्व, लॉ एंड ऑर्डर आदि सारण जिले से होता है नियंत्रित

अकिलपुर पंचायत के इन सात विद्यालयों का संचालन व निगरानी पटना जिले के दानापुर अंचल से होता है. विद्यालयों में शिक्षकों की पोस्टिंग समेत अन्य कार्यों का संचालन भी दानापुर से नियंत्रित होता है. स्कूल दिघवारा प्रखंड अधीन स्थित है, लेकिन कोई भी काम दिघवारा प्रखंड से नहीं होता है. इस पंचायत में शिक्षा प्रायोजित योजनाओं का क्रियान्वयन दानापुर से होता है. ऐसे में स्कूलों की निगरानी, सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन के साथ विद्यालय में होने वाले विकास कार्यों का संचालन भी दानापुर से होता है. ग्रामीणों का कहना है कि गंगा पार के इन विद्यालयों में सतत निगरानी के अभाव में स्कूलों का संचालन बेहतर तरीके से नहीं हो पाता है. ग्रामीणों की मांग है कि स्वास्थ्य, राजस्व, लॉ एंड ऑर्डर जैसी चीजों का संचालन जब सारण जिले से होता है, तो इस पंचायत के सरकारी स्कूलों के संचालन का जिम्मा भी सारण जिले को दे दिया जाये, ताकि एक जिले से सभी कार्यों का नियंत्रण व निगरानी आसानी से संभव हो सके और बच्चों के माता-पिता व अभिभावकों को दो जिलों के चक्कर से मुक्ति मिल सके. पंचायत में अकिलपुर, दूधिया, बाकरपुर, सलहली रामदासचक, बभनगामा बंगलापर, पकौलिया और बतरौली समेत कुल आठ गांव स्थित हैं. इन आठ गांवों में पकौलिया, रामदासचक और सलहली तीन ऐसे गांव हैं, जहां एक भी सरकारी विद्यालय स्थित नहीं हैं. ऐसे में इन गांवों के सैकड़ों बच्चों को प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए भी तीन से चार किलोमीटर की दूरी तय कर दूसरे गांव में स्थित सरकारी विद्यालयों में जाना पड़ता है.

पूर्व विधायक ने विधानसभा में उठाया था मुद्दा

पूर्व विधायक डॉ रामानुज प्रसाद ने अपने कार्यकाल के दौरान विधानसभा में अकिलपुर पंचायत के लोगों की दो जिले के चक्कर में हो रही परेशानी का मुद्दा उठाया था, जिसके बाद लॉ एंड ऑर्डर को पटना जिले से हटाकर सारण किया गया. इससे पूर्व इस पंचायत के लोगों को कूपन दिघवारा से और राशन दानापुर से मिलता था. सारण जिले के युवाओं का चरित्र प्रमाण पत्र पटना जिले से बनता था. अब ऐसी परेशानी दूर हुई है, लेकिन शिक्षा का विषय आज भी दो जिलों के चक्कर में फंसा हुआ है.

क्या कहती हैं मुखिया

अकिलपुर पंचायत की मुखिया मिंता देवी ने कहा कि दिघवारा प्रखंड में आयोजित बीडीसी की बैठक में बीते दिनों पंचायत के तीन गांवों में एक भी सरकारी स्कूल नहीं होने का मुद्दा उठाया था. पंचायत के स्कूलों की निगरानी दानापुर से होती है. ऐसे में स्कूलों में शिक्षकों की पोस्टिंग, निगरानी, अनुश्रवण आदि जैसे अन्य कार्यों के बारे में जानने में परेशानी होती है. पंचायत प्रतिनिधि द्वारा अनुश्रवण में भी परेशानी बढ़ जाती है. सारण जिले से ही सबकुछ कर देना चाहिए.

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Published by: Shailesh kumar

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