सारण के बनियापुर में बारिश की बेरुखी से धान के खेतों में पड़ी दरारें, किसानों की बढ़ी चिंता

बारिश के अभाव में किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं. तेज धूप से धान की फसलें सूख रही हैं और खेतों में दरारें पड़ रही हैं. पंपिंग सेट से सिंचाई की बढ़ती लागत से किसान बेहाल हैं.

Drought-affected paddy crops: मॉनसून के यूटर्न लेने के बाद मौसम के तल्ख तेवर को देख किसान एक बार फिर खुद को बेबस और लाचार महसूस कर रहे हैं. पिछले तीन-चार दिनों से हो रही चिलचिलाती धूप की वजह से सावन के महीने में ज्येष्ठ-बैसाख जैसा नजारा देखने को मिल रहा है. इससे किसानों का सब्र जवाब देने लगा है.

काफी हिम्मत जुटाकर और खर्च की परवाह किए बगैर किसानों ने कड़ी मेहनत के बल पर पंपिंग सेट चलाकर जैसे-तैसे धान की रोपाई तो कर ली, लेकिन अब खेतों में पानी के अभाव में दरारें पड़ने लगी हैं. यह किसानों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है. अब तक औसत से काफी कम बारिश होने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीर खिंच गई है.

अवध कुमार, संतोष राय, मनोरंजन कुमार, सुदामा ओझा, महेश राम सहित दर्जनों किसानों का कहना है कि एक ओर बारिश नहीं होने से धान के पौधे सूखने लगे हैं, वहीं दूसरी ओर मक्के के पौधे भी पीले पड़ने लगे हैं.

पौधों में नहीं हो रही वृद्धि

मौसम अनुकूल होने की उम्मीद में किसान पंपिंग सेट चलाकर धान की पटवन कर रहे हैं. मगर तेज धूप होने से उनकी उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है. आसमानी पानी नहीं होने से खेत जल्द ही सूख जा रहे हैं. इससे किसानों के समक्ष लगातार पटवन की समस्या उत्पन्न हो गई है. इससे आर्थिक, शारीरिक और मानसिक बोझ बढ़ने लगा है.

प्रतिकूल मौसम की वजह से धान के पौधों में आशा के अनुरूप वृद्धि नहीं होने से किसान चिंतित दिख रहे हैं. पानी के अभाव में खेतों में दरारें फट गई हैं, जिससे पौधों का विकास अवरुद्ध हो गया है. खेतों में पानी नहीं रहने से खरपतवार में भी तेजी से वृद्धि होने लगी है. इससे किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं.

बारिश के अभाव में 30 प्रतिशत किसान रोपनी से रहे वंचित

किसानों की मानें तो इस बार महज 70 प्रतिशत किसानों ने ही धान की रोपाई की है, जबकि शेष किसान प्रतिकूल मौसम को देखते हुए बिचड़ा ही नहीं डाल सके. इससे रोपनी का कार्य प्रभावित हो गया.

वयोवृद्ध और अनुभवी किसान मदन सिंह ने बताया कि आषाढ़ का महीना सूखे में गुजर गया. इससे धान और मक्के की रोपनी बुरी तरह प्रभावित हुई है. मौसम की स्थिति को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि देर से की गई धान और मक्के की बुआई से किसानों को आशा के अनुरूप लाभ नहीं मिल सकेगा. वहीं, मौसम का हाल अगर इसी तरह बना रहा तो आगामी फसल के लिए भी किसानों के समक्ष परेशानी उत्पन्न होगी.

पंपिंग सेट से पटवन करने में बढ़ रही लागत

कुछ साधन संपन्न किसानों को छोड़ दें तो लघु एवं सीमांत किसानों और बटाई पर खेती करने वाले किसानों को पंपिंग सेट चलाकर धान के पौधों की लगातार सिंचाई करने में आर्थिक रूप से मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. 200 रुपये प्रति घंटे की दर से पंपिंग सेट चालक पानी चला रहे हैं.

आसमानी पानी नहीं होने से 8-10 दिन के अंतराल पर पौधों की सिंचाई करनी पड़ रही है. इससे किसानों को अतिरिक्त राशि का वहन करना पड़ रहा है. वहीं, सिंचाई विभाग द्वारा कई जगहों पर किसानों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से नहरों की सफाई तो की गई, मगर समय पर पानी नहीं आने से किसान नहर के पानी का लाभ नहीं उठा सके.

कन्हौली संजग्राम स्थित नहर में अब तक पानी नहीं आने से किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है, जिससे किसानों में रोष व्याप्त है. वहीं, प्रखंड अंतर्गत एक दर्जन से अधिक राजकीय नलकूप हैं, मगर ज्यादातर नलकूप जर्जर स्थिति में हैं.

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By Mantu kumar

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