Saran News : सारण जिले को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने अभियान की रफ्तार तेज कर दी है. राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के निर्देश पर जिले में एक्टिव केस फाइंडिंग (एसीएफ) अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा. इसके तहत टीबी के लक्षण वाले तथा उच्च जोखिम श्रेणी के लोगों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर अपफ्रंट एनएएटी जांच कराई जाएगी. सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने जिले के सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों, यक्ष्मा पर्यवेक्षकों (एसटीएस/एसटीएलएस) और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करते हुए अभियान को निर्धारित समय-सीमा के भीतर शत-प्रतिशत लक्ष्य के साथ पूरा करने का निर्देश दिया है.
घर-घर जाकर होगी संभावित मरीजों की पहचान
जारी निर्देश के अनुसार सभी स्वास्थ्य संस्थानों को अपने-अपने क्षेत्र में एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान तेज करना होगा. अभियान के तहत घर-घर जाकर टीबी के संभावित मरीजों की पहचान की जाएगी. विशेष रूप से लंबे समय से खांसी, बुखार, वजन में कमी या टीबी से जुड़े अन्य लक्षण वाले लोगों तथा उच्च जोखिम श्रेणी के व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जाएगी. ऐसे सभी लोगों की अपफ्रंट एनएएटी जांच कराकर बीमारी की शीघ्र पुष्टि और तत्काल उपचार शुरू कराया जाएगा.
गुणवत्तापूर्ण सैंपल संग्रह पर रहेगा विशेष जोर
सिविल सर्जन ने निर्देश दिया है कि सभी संदिग्ध मरीजों का गुणवत्तापूर्ण स्पुटम सैंपल संग्रह कर निर्धारित समय के भीतर सीबीएनएएटी (CBNAAT) या ट्रूनैट (Truenat) मशीन से जांच कराई जाए. उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा, क्योंकि सही सैंपल और समय पर जांच से ही टीबी की सटीक पहचान संभव है.
टीबी मरीजों की पहचान में एआई तकनीक का होगा उपयोग
टीबी उन्मूलन अभियान में आधुनिक तकनीक का भी सहारा लिया जाएगा. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) द्वारा चिन्हित संभावित टीबी मरीजों का भी स्पुटम सैंपल लेकर अपफ्रंट टेस्ट अनिवार्य रूप से कराया जाएगा. इसके साथ ही सभी प्राथमिक चिकित्सकों को स्क्रीनिंग और जांच प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने तथा अधिक से अधिक संभावित मरीजों की पहचान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं.
निक्षय पोर्टल पर समय से होगी रिपोर्टिंग
सिविल सर्जन ने सभी स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जांच किए गए प्रत्येक मरीज की रिपोर्ट समय पर निक्षय पोर्टल पर दर्ज की जाए और नियमित रूप से अपडेट की जाए. उन्होंने कहा कि अभियान की दैनिक प्रगति की समीक्षा की जाएगी. रिपोर्टिंग में किसी भी प्रकार की लापरवाही या विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा, क्योंकि टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की सफलता समयबद्ध डेटा अपडेट और प्रभावी निगरानी पर निर्भर करती है.
समयबद्ध लक्ष्य हासिल करने का निर्देश
सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों, यक्ष्मा पर्यवेक्षकों और संबंधित अधिकारियों को अभियान पूरी गंभीरता से संचालित करते हुए निर्धारित समय-सीमा के भीतर शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने का निर्देश दिया गया है. सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने कहा कि टीबी मरीजों की समय पर पहचान और शीघ्र उपचार से संक्रमण की श्रृंखला को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अभियान की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी और किसी भी स्तर पर शिथिलता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
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