छपरा (सदर) : छपरा शहर के हवाई अड्डे की जमीन पर अतिक्रमण कर स्थायी एवं अस्थायी निर्माण तथा ईंट आदि परिसंपत्तियों का मनमाने ढंग से या चोरी-छिपे उपयोग करने का मामला तूल पकड़ रहा है. हवाई अड्डा परिसर के चौकीदार दशरथ राय की शिकायत पर भवन निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता द्वारा संबंधित एसडीओ से हवाई अड्डा की परिसंपत्तियों, अतिक्रमण आदि के संबंध में ब्योरा मांगा गया है.
जमीन पर अतिक्रमण के मामले ने पकड़ा तूल
छपरा (सदर) : छपरा शहर के हवाई अड्डे की जमीन पर अतिक्रमण कर स्थायी एवं अस्थायी निर्माण तथा ईंट आदि परिसंपत्तियों का मनमाने ढंग से या चोरी-छिपे उपयोग करने का मामला तूल पकड़ रहा है. हवाई अड्डा परिसर के चौकीदार दशरथ राय की शिकायत पर भवन निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता द्वारा संबंधित एसडीओ से […]

वहीं कार्यपालक अभियंता द्वारा जिला पदाधिकारी से भी मिलकर नागरिक उड्डयन विभाग की इस जमीन की पैमाइशी सदर सीओ की देख-रेख में कराने की बात कही जा रही है. कार्यपालक अभियंता की मानें तो इस संबंध में हवाई अड्डे के चौकीदार दशरथ राय द्वारा बड़ा तेलपा निवासी दो लोगों के द्वारा हवाई अड्डे की जमीन पर निर्माण कराने, सरकारी ईंट का दुरुपयोग करने तथा चौकीदार के मना करने पर मारपीट पर उतारू होने की शिकायत की है.
लाखों खर्च कर बनने वाली चहारदीवारी को दर्जन भर स्थानों पर अतिक्रमणकारियों ने तोड़ा : उड्डयन विभाग की इस जमीन पर समय-समय पर भवन प्रमंडल के द्वारा चहारदीवारी का निर्माण उत्तर दिशा से, दक्षिण दिशा से कराया जाता रहा है. परंतु, पूरब तथा पश्चिम में चहारदीवारी निर्माण का कार्य नहीं होने के कारण एक ओर जहां चहारदीवारी नहीं है. उधर आसपास के लोगों के द्वारा भूमि का अतिक्रमण किया जा रहा है. वहीं जिधर चहारदीवारी है, उधर दर्जन भर स्थानों पर लोगों के द्वारा मनमाने ढंग से चहारदीवारी तोड़कर दोपहिया एवं चारपहिया वाहनों के आने-जाने के लायक रास्ता बना लिया गया है.
परंतु, लाखों रुपये खर्च कर चहारदीवारी बनाने वाला प्रशासन कभी भी मनमाने ढंग से चहारदीवारी को तोड़ने वालों तथा जमीन पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई नहीं करता, जिससे एक ओर सरकारी संपत्ति जहां बर्बाद हो रही है. वहीं अवैध कब्जा करने वालों का मनोबल बढ़ रहा है. यदि प्रशासन के द्वारा पूरी जमीन की पैमाइश कराकर चहारदीवारी का पूरा निर्माण करा दिया जाता तथा चहारदीवारी तोड़ने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाती, तो शायद यह नौबत नहीं आती.