छपरा (सदर) : सारण जिले में बालू को लेकर विगत जुलाई से लगातार चल रही प्रशासनिक कार्रवाई एवं बालू माफियाओं के बीच आमने-सामने होने का दौर रुक नहीं रहा है. मंगलवार को भी लगातार दूसरे दिन भी बालू माफियाओं एवं उनके समर्थकों ने एनएच 19 को विभिन्न सड़कों पर अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ जाम […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
छपरा (सदर) : सारण जिले में बालू को लेकर विगत जुलाई से लगातार चल रही प्रशासनिक कार्रवाई एवं बालू माफियाओं के बीच आमने-सामने होने का दौर रुक नहीं रहा है. मंगलवार को भी लगातार दूसरे दिन भी बालू माफियाओं एवं उनके समर्थकों ने एनएच 19 को विभिन्न सड़कों पर अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ जाम कर दिया. हालांकि जिला प्रशासन ने मंगलवार को अपनी ओर से बालू उठाव के कार्य को तत्काल विभागीय आदेश व कोर्ट के फैसले के आलोक में स्थगित रखा.
वहीं विभिन्न 15 घाटों पर लगाये गये 26 मजिस्ट्रेट व 500 से ज्यादा पुलिस बल खौफ के बीच अपने दायित्वों के निर्वहन के लिये तैनात दिखे. हालांकि सारण जिला जहां औद्योगिक गतिविधियां काफी कम है वैसी स्थिति में बालू का व्यवसाय छपरा शहर से लेकर सोनपुर तक दर्जनों गांवों के सैकड़ों बालू माफियाओं के अलावा हजारों मजदूरों की कमाई एवं जीवनयापन का मुख्य धंधा है.
ऐसी स्थिति में बालू के भंडारण एवं परिवहन के कार्य पर रोक लगाये जाने से जिला एवं जिला से बाहर आर विभिन्न नदी घाटों पर ट्रकचालकों व मजदूरों के खाने-पीने के अलावें अन्य बुनियादी जरूरत उपलब्ध कराकर छपरा सदर, दिघवारा, सोनपुर के गंगा के आस-पास के गांवों के हजारों परिवार का जीवन यापन भी होता है.
ऐसी स्थिति में जबभी प्रशासन बालू व्यवसाय से जुड़े माफियाओं के कार्य में अड़ंगा लगाती है या कानून के तहत उनके व्यवसाय को रोकने का कार्य करती है तो इन बालू माफियाओं से प्रभावित होकर बालू के पेशे से जुड़े प्रत्यक्ष के अलावा परोक्ष मजदूर भी उनका खुलकर साथ देते हैं. इससे प्रशासन के सामने इन बालू माफियाओं पर नियंत्रण रख पाना निश्चित तौर पर चुनौती भरा साबित हो रहा है.
सोमवार को भी अवैध ढंग से ही सही बालू माफियाओं द्वारा उसपार से नावों से बालू मंगाकर भंडारित करने वाले स्थान से जब प्रशासन बालू उठाने लगा तभी बालू माफियाओं एवं उनके समर्थकों ने प्रशासन पर रोड़ेबाजी के साथ-साथ सड़क जाम अगलगी की घटनाओं को अंजाम दिया.
अन्य व्यवसायों पर भी बालू के परिवहन के रोक का असर
सारण जिले में दूसरे राज्यों से खाद्य सामग्री ट्रक के द्वारा लायी जाती है. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश तथा दिल्ली से खाद्य सामग्री लाने वाले ट्रक छपरा जिले से बालू लेकर जाते थे. ऐसी स्थिति में उन्हें यूपी में बालू बेचने पर अच्छी खासी कमाई होती थी. अब जब बाहर के ट्रक सामान लेकर आते हैं तथा छपरा जिला से बालू लेकर जाने का मौका नहीं मिलता तो वैसी स्थिति में एक सामान लाने वाले ट्रक 35 से 40 फीसदी ज्यादा किराया दुकानदारों से वसूल रहे हैं.
उनका कहना होता है कि अब बालू नहीं ले जाने के कारण पूर्व के किराये में परिवहन संभव नहीं है. वहीं ज्यादा किराया लगने के कारण व्यवसायी उपभोक्ताओं से सामग्री का ज्यादा लागत वसूलने को विवश है. वहीं बालू के व्यवसाय पर रोक के कारण भवन निर्माण से जुड़े मजदूरों, बढ़ई, राजमिस्त्री के समक्ष भी बेकारी दिख रही है. आखिर बालू नहीं होने के कारण जब निर्माण कार्य ही नहीं होगा तो उनके हाथों को रोजगार कैसे मिलेगा.
क्या कहते हैं डीएम
बालू के भंडारण एवं परिवहन पर पटना उच्च न्यायालय के आदेश एवं विभागीय निर्देश के आलोक में ही अगला निर्णय लिया जायेगा. मंगलवार को बालू के उठाव का काम स्थगित रखा गया है. वहीं सभी मजिस्ट्रेट व पुलिस बल को अपनी ड्यूटी पर रहने के लिये निर्देशित किया गया है. किसी भी स्थिति में लोगों को कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए. प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं.