Samastipur : आरटीई के तहत 23 निजी स्कूलों की जांच रिपोर्ट की होगी समीक्षा

शिक्षा के अधिकार के तहत नामांकित बच्चों की किताब और पोशाक के मद में निजी स्कूलों ने शिक्षा विभाग से करोड़ों रुपये की मांग की है.

समस्तीपुर . शिक्षा के अधिकार के तहत नामांकित बच्चों की किताब और पोशाक के मद में निजी स्कूलों ने शिक्षा विभाग से करोड़ों रुपये की मांग की है. निजी स्कूलों की यह मांग विभाग के गले नहीं उतर पा रही है. आरटीई के तहत नामांकन में सामने आती रही गड़बड़ियों को देखते हुए अब किताब व पोशाक के नाम पर भी फर्जीवाड़े की आशंका है. ऐसे में अपर मुख्य सचिव एस. सिद्वार्थ ने निजी स्कूलों की मांग की जांच का निर्देश दिया था. लेकिन जांच की प्रक्रिया करीब 11 माह बाद भी लंबित है. विभागीय दिशा-निर्देश के आलोक में डीएम ने जिले के 172 निजी स्कूलों की जांच विभिन्न विभाग में तैनात पदाधिकारियों को दी. करीब सात माह बाद 149 निजी स्कूलों की जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई और उसे ज्ञानदीप पोर्टल पर अपलोड किया गया है ताकि प्रतिपूर्ति की राशि का भुगतान हो सके. वहीं 23 निजी स्कूलों में से कुछ की जांच रिपोर्ट जांच अधिकारी के स्थानांतरण होने के कारण लंबित है तो कुछ रिपोर्ट की समीक्षोपरान्त निर्णय लिया जायेगा. डीपीओ एसएसए जमालुद्दीन ने बताया कि 23 निजी स्कूलों से संबंधित प्रस्ताव डीएम के समक्ष रखा जायेगा ताकि जांच की प्रक्रिया पूर्ण कराई जा सके. विदित हो कि बड़ी संख्या में पोशाक और किताब की राशि मांगी गई है. इसमें सत्रवार जांच पदाधिकारी जांच करेंगे. छात्रों-अभिभावकों का बयान भी दर्ज करेगी. जांच पदाधिकारी की अनुशंसा पर ही राशि दी जायेगी. गड़बड़ी के संकेत वर्ष 2019-20 में विद्यालयों द्वारा ज्ञानदीप पोर्टल पर अपलोड किये गये आंकड़ों की समीक्षा के क्रम में मिले हैं. सूत्रों की माने तो जांच के लिए जिला स्तर पर गठित कमेटी द्वारा अगर बारीकी से जांच की जाती है तो इस मामले में बड़ी गड़बड़ी उजागर होगी. हालांकि इसे लेकर आये दिन कई सवाल उठते रहे हैं. ऐसे-ऐसे स्कूल भी बड़ी राशि का दावा करते हैं जिनके पास ढंग की सुविधाएं तक नहीं है.

वर्ष 2019 से 2024 तक के जांच का आदेश

निजी स्कूलों ने नामांकित बच्चों की फीस के साथ किताब, पोशाक की राशि का भी दावा किया है. अपर मुख्य सचिव ने समस्तीपुर समेत सूबे के सभी जिलों के डीएम को इसकी जांच का निर्देश दिया है. अपर मुख्य सचिव ने वर्ष 2019 से 2024 तक हर सत्र के लिए अलग-अलग जांच का आदेश दिया है. डीएम अपने स्तर से जांच करायेंगे. सिर्फ स्कूलों में जाकर ही जांच नहीं होगी, बल्कि बच्चों के अभिभावकों से भी मिलकर इसकी सत्यता जानेगी. आरटीई के तहत नामांकित बच्चों के लिए सरकार की ओर से निजी स्कूलों को प्रति बच्चा 11869 रुपये दिये जा रहे हैं. शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह राशि फीस, किताब और पोशाक के लिए रहती है. लेकिन, अधिकांश स्कूल केवल नि:शुल्क नामांकन ही इस राशि के तहत लेते हैं. अपर मुख्य सचिव ने आदेश दिया है कि ज्ञानदीप पोर्टल पर कुछ स्कूलों ने केवल फीस की राशि का दावा किया है.

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Published by: Krishan mohan pathak

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