Bihar Revenue Department: बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने कार्य में घोर लापरवाही, अनुशासनहीनता और उच्च अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने के मामले में सख्त प्रशासनिक कदम उठाया है. सीतामढ़ी के परिहार अंचल की तत्कालीन प्रभारी सीओ मोनी कुमारी (वर्तमान में सीओ, सिंधिया, समस्तीपुर) के खिलाफ विभागीय जांच में आरोप सही साबित होने पर संचयी प्रभाव के बिना तीन वेतनवृद्धि पर रोक लगाने का दंड दिया गया है.
निरीक्षण में उजागर हुई थीं गंभीर गड़बड़ियां
पूरे मामले की शुरुआत 8 जनवरी 2025 को हुई थी, जब अपर समाहर्ता (सीतामढ़ी) ने परिहार अंचल कार्यालय का औचक निरीक्षण किया था. इस दौरान कार्यों में भारी अनियमितता, सुस्ती और अव्यवस्था पाई गई थी. अपर समाहर्ता और डीसीएलआर सीतामढ़ी सदर द्वारा बार-बार पत्र और स्मार-पत्र भेजने के बावजूद सीओ ने न तो कोई स्पष्टीकरण दिया और न ही निर्देशों का पालन किया. इसके बाद जिलाधिकारी के माध्यम से विभाग को आरोप पत्र भेजा गया.
विभागीय जांच और कार्रवाई के प्रमुख बिंदु
- अनुशासनिक प्रक्रिया: विभाग ने 26 सितंबर 2025 को नियमावली के तहत औपचारिक अनुशासनिक कार्रवाई शुरू की.
- जांच रिपोर्ट: 17 जनवरी 2026 को संचालन पदाधिकारी ने रिपोर्ट सौंपी, जिसमें सभी आरोप पूरी तरह प्रमाणित पाए गए.
- अंतिम निर्णय: 24 जून 2026 को दिए गए सीओ के स्पष्टीकरण को असंतोषजनक पाते हुए तीन वेतनवृद्धि रोकने का आदेश जारी हुआ.
राज्यपाल के आदेश से संकल्प जारी
जांच में दोषी साबित होने के बाद बिहार के राज्यपाल के आदेश से राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के संयुक्त सचिव गिरधारी लाल ने संकल्प सह दंडादेश जारी कर दिया है. इसके साथ ही इस अनुशासनिक कार्रवाई का औपचारिक समापन कर दिया गया. इस कार्रवाई से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है.
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