Samastipur News: समस्तीपुर जिला अंतर्गत डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा (बिहार) के अधीनस्थ कृषि विज्ञान केंद्र, बिरौली द्वारा एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. केंद्र द्वारा डॉ. रेड्डी फाउंडेशन, समस्तीपुर के एक्सटेंशन फंक्शनरीज के लिए ‘डायरेक्ट सीडेड राइस’ (डीएसआर – सीधी बुआई तकनीक) विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शानदार आयोजन किया गया. कृषि अभियंत्रण विभाग की वैज्ञानिक एवं कार्यक्रम समन्वयक इंजी. विनीता कश्यप के कुशल नेतृत्व में आयोजित इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में कुल 20 एक्सटेंशन फंक्शनरीज ने भाग लेकर आधुनिक खेती के गुर सीखे.
तकनीक को गांव-गांव तक पहुंचाने का आह्वान
इस विशेष कार्यक्रम का भव्य उद्घाटन कृषि विज्ञान केंद्र, बिरौली के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. आर. के. तिवारी तथा पूसा विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक एवं कृषि वैज्ञानिक प्रो. डॉ. मुकेश कुमार द्वारा संयुक्त रूप से किया गया:
- भविष्य की बड़ी आवश्यकता: अपने उद्घाटन संबोधन में डॉ. आर. के. तिवारी ने जोर देकर कहा कि धान उत्पादन में डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) तकनीक अब भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है.
- संसाधनों की बचत: यह उन्नत तकनीक कम पानी, कम श्रम (मजदूर) एवं बेहद कम लागत में किसानों को अधिक से अधिक उत्पादन देने में पूरी तरह सहायक है.
- जलवायु परिवर्तन का तोड़: उन्होंने बताया कि तेजी से बदल रहे जलवायु परिवर्तन एवं गांवों में मजदूरों की भारी कमी जैसी विपरीत परिस्थितियों में डीएसआर तकनीक किसानों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है. उन्होंने सभी प्रतिभागियों से इस तकनीक को जिले के गांव-गांव तक पहुंचाने की अपील की.
खरपतवार नियंत्रण सबसे बड़ी चुनौती
धान की सीधी बुआई (DSR) में आने वाली सबसे बड़ी व्यावहारिक दिक्कत को लेकर कृषि वैज्ञानिकों ने विस्तार से चर्चा की और पॉइंट वाइज इसके समाधान बताए:
- उत्पादन पर असर: प्रो. डॉ. मुकेश कुमार ने ‘डीएसआर तकनीक में खरपतवार प्रबंधन’ विषय पर अपना विस्तृत व्याख्यान दिया. उन्होंने साफ तौर पर स्वीकार किया कि इस तकनीक में खरपतवार (घास-फूस) नियंत्रण सबसे बड़ी चुनौती है, जिसकी अनदेखी से धान का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है.
- समेकित वैज्ञानिक उपाय: डॉ. मुकेश ने खरपतवार प्रबंधन के विभिन्न आधुनिक वैज्ञानिक उपायों, सही समय पर सटीक खरपतवारनाशी (हर्बिसाइड्स) के प्रयोग एवं समेकित खरपतवार प्रबंधन तकनीकों की बारीक जानकारी दी. उन्होंने फील्ड में किसानों द्वारा सामना की जाने वाली हर समस्या का ऑन-स्पॉट समाधान भी बताया.
आधुनिक कृषि यंत्रों की दी गई लाइव ट्रेनिंग
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों और एक्सटेंशन फंक्शनरीज को केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि मशीनों का व्यावहारिक ज्ञान भी दिया गया:
- उन्नत कृषि यंत्र: इंजी. विनीता कश्यप ने प्रशिक्षण के दौरान डीएसआर तकनीक में उपयोग होने वाले बेहद उन्नत कृषि यंत्रों की तकनीकी जानकारी साझा की.
- मशीनों का सही कैलिब्रेशन: उन्होंने इंक्लाइंड प्लेट प्लांटर एवं ड्रम सीडर जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग, उनकी कैलिब्रेशन प्रक्रिया, रख-रखाव एवं बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में व्यावहारिक ट्रेनिंग प्रदान की. उन्होंने बताया कि इन यंत्रों के सही उपयोग से बीज और समय दोनों की भारी बचत होती है तथा पौधों का बेहतर अंकुरण सुनिश्चित किया जा सकता है.
कृषि विशेषज्ञों की खास सलाह:
प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंत में कृषि वैज्ञानिकों ने आढ़तियों और एक्सटेंशन कर्मियों को सलाह दी कि वे किसानों को खेत तैयार करने के तुरंत बाद सही नमी में सीधी बुआई करने और पहले 15 से 30 दिनों तक खरपतवार की कड़ी निगरानी रखने के लिए जागरूक करें.
समस्तीपुर से सुभाष चंद्र कुमार की रिपोर्ट
