समस्तीपुर के मोरवा से मनोज वर्मा की रिपोर्ट
Samastipur News: मोरवा प्रखंड में सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र योजना में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद अब प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है. विभिन्न पंचायतों में बनाए गए 12 सक्षम आंगनबाड़ी केंद्रों में सुविधाएं विकसित किए बिना ही लाखों रुपये की निकासी कर लेने के आरोप लगे हैं. मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रखंड प्रमुख सान्या नेहा ने जांच के आदेश दिए हैं और सीडीपीओ कार्यालय से पूरी संचिका तलब की है.
प्रमुख ने मांगी पूरी रिपोर्ट
बुधवार को प्रमुख सान्या नेहा ने कहा कि सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र योजना में अनियमितता की शिकायत मिली है. पूरे मामले की हर बिंदु पर जांच कराई जाएगी. यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
बिना सुविधा दिए निकाल ली गई राशि
जानकारी के मुताबिक प्रखंड के 12 आंगनबाड़ी केंद्रों को सक्षम केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रत्येक केंद्र पर करीब 65 हजार रुपये खर्च करने का प्रावधान था. इसमें रेन वाटर हार्वेस्टिंग, पोषण वाटिका, बाल पेंटिंग और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए राशि आवंटित की गई थी. लेकिन कई केंद्रों पर न पोषण वाटिका बनी और न ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था हो सकी. इसके बावजूद पूरी राशि निकाल ली गई.
बिजली और पानी की सुविधा तक नहीं
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई आंगनबाड़ी केंद्रों में बिजली, शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं. कई जगह वाई-फाई और डिजिटल टीवी लगाने की बात सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई. इसके बावजूद रिपोर्ट में सबकुछ सही दिखा दिया गया.
12 केंद्रों में हुआ था चयन
बताया गया कि कमतौल, चकपहार, सोंगर, चकसिकंदर, इन्द्रवारा, चकलाल शाही, पहाड़पुर, कौवा, चकजलाल, चंदौली, हरपुर भिंडी और कुमैया समेत 12 आंगनबाड़ी केंद्रों का चयन सक्षम केंद्र के रूप में किया गया था. योजना का उद्देश्य बच्चों और गर्भवती महिलाओं को बेहतर पोषण और आधुनिक सुविधाएं देना था.
पोषण वाटिका और जल संरक्षण योजना भी अधूरी
योजना के तहत पोषण वाटिका बनाकर हरी सब्जियां उगानी थीं, ताकि बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार मिल सके. वहीं रेन वाटर हार्वेस्टिंग के जरिए वर्षा जल संचय की व्यवस्था करनी थी. लेकिन अधिकांश केंद्रों में यह कार्य शुरू तक नहीं हुआ.
अब जांच के घेरे में अधिकारी और कर्मी
मामला सामने आने के बाद अब विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना काम पूरा हुए राशि निकासी कैसे हुई, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.
